Edited By ,Updated: 30 Apr, 2026 04:42 AM

भारत में प्रतिदिन लगभग 27,000 लोगों की मौत होती है जिनके अंग भी उनके अंतिम संस्कार के साथ नष्ट हो जाते हैं परंतु शरीर के 9 अंग मृत्यु के बाद दान किए जा सकते हैं जिससे 28 प्रकार के रोगियों को नव जीवन मिल सकता है, मृत शरीर की आंख, लिवर, किडनी, फेफड़े,...
भारत में प्रतिदिन लगभग 27,000 लोगों की मौत होती है जिनके अंग भी उनके अंतिम संस्कार के साथ नष्ट हो जाते हैं परंतु शरीर के 9 अंग मृत्यु के बाद दान किए जा सकते हैं जिससे 28 प्रकार के रोगियों को नव जीवन मिल सकता है, मृत शरीर की आंख, लिवर, किडनी, फेफड़े, दिल, त्वचा आदि।
कई बार किसी दुर्घटना में व्यक्ति के ‘ब्रेन डैड’ हो जाने पर उसका बचना कठिन होता है। तब ऐसे लोगों के परिजनों द्वारा दान किए उनके अंग किसी दूसरे मृत्यु किनारे पड़े रोगी का जीवन बचा सकते हैं। दान की गई त्वचा 5 वर्ष तक सुरक्षित रहती है तथा यह तेजाब हमले, आतिशबाजी के शिकार या जले लोगों के काम आ सकती है। ‘ब्रेन डैड’ व्यक्ति का लिवर 3 लोगों के काम आ सकता है। इसी प्रकार शरीर के अन्य कई अंग भी दूसरे जरूरतमंदों के काम आ सकते हैं। यहां पिछले लगभग अढ़ाई महीनों में सामने आए अंगदान के कुछ उदाहरण निम्न में दर्ज हैं :
* 16 फरवरी को ‘कोट्टïायम’ (केरल) में सड़क दुर्र्घटना में मरने वाली 10 वर्षीय बच्ची के माता-पिता ने उसके अंगदान करने का फैसला किया। इसी के अनुरूप उन्होंने उसके लिवर, दोनों किडनियों, हार्ट वाल्व तथा आंखों का दान कर दिया जिससे 5 जरूरतमंदों को नवजीवन मिला।
* 23 फरवरी को ‘बेंगलुरू’ (कर्नाटक) में मोटरसाइकिल से गिर कर ब्रेन डैड हुए ‘दर्शन’ नामक युवक के परिजनों ने उसके लिवर, किडनी व हार्ट वाल्व सहित अन्य अंग दान कर दिए जिससे 6 रोगियों को नवजीवन मिला।
* 24 मार्च को एक दुर्घटना में घायल होने के परिणामस्वरूप 13 वर्षों से कोमा में चले आ रहे ‘हरीश राणा’ के दिल्ली एम्स में निधन के बाद उनके माता-पिता ने उनके हार्ट वाल्व और कार्निया जरूरतमंदों के लिए दान कर दिए। मृत्यु के बाद भी ‘हरीश राणा’ किसी के दिल में धड़कते रहेंगे और उनकी आंखें दुनिया को देखती रहेंगी।
* 17 अप्रैल को ‘अहमदाबाद’ (गुजरात) के सिविल अस्पताल में 39 वर्षीय ब्रेन डैड ‘मनुभाई परमार’ के परिजनों ने उनका हार्ट, लिवर, दोनों किडनियां, आंखें तथा त्वचा समेत 7 अंग जरूरतमंदों के लिए दान कर दिए। इनसे 7 जरूरतमंद मरीजों को नवजीवन मिला।
* 23 अप्रैल को ‘रोहतक’ (हरियाणा) स्थित पी.जी.आई. में सड़क दुर्घटना में ब्रेन डैड पड़े 16 वर्षीय ‘हर्ष’ की एक किडनी हैलीकाप्टर द्वारा पंचकूला स्थित ‘चंडी आर्मी अस्पताल’ में भेज कर एक जरूरतमंद को लगाई गई तथा उसका लिवर ‘इंस्टीच्यूट आफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज दिल्ली’ में जरूरतमंद के लिए भेजा गया तथा अन्य अंग पी.जी.आई. रोहतक में जरूरतमंदों को लगाने के लिए रखे गए हैं।
* 27 अप्रैल को चारा काटने वाली मशीन से हुई दुर्घटना में दोनों हाथ गंवाने वाली युवती को दिल्ली के ‘सर गंगाराम अस्पताल’ में एक ब्रेन डैड डोनर के परिजनों द्वारा दान किए गए हाथ लगा कर नया जीवन दिया गया।
* 27 अप्रैल को ही ‘सेलियामोडु’ (पुड्डुचेरी) में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल रोगी को ‘इंदिरा गांधी सरकारी जनरल अस्पताल’ के डाक्टरों द्वारा ब्रेन डैड घोषित कर देने के बाद उनके परिजनों ने उनकी 2 किडनियां और काॢनया जरूरतमंदों को दान कर दिए ।
किसी व्यक्ति द्वारा किए गए खूनदान से जहां किसी जरूरतमंद के प्राण बचते हैं, इसी तरह ‘ब्रेन डैड’ व्यक्ति के अंगदान से भी किसी जरूरतमंद के प्राण बचाए जा सकते हैं और समाज में जो सम्मान मिलता है सो अलग।
मृत शरीर का अंतिम संस्कार कर देने से वे अंग भी नष्ट हो जाते हैं, जिनमें प्राण होने के कारण उनसे किसी जरूरतमंद को नवजीवन मिल सकता है। अत: लोगों को ब्रेन डैड व्यक्ति या मृत्यु होने पर व्यक्ति के इस्तेमाल करने योग्य अंगों का दान कर देना चाहिए क्योंकि इससे बड़ा कोई दान नहीं है।-विजय कुमार