Edited By ,Updated: 05 Aug, 2026 03:02 AM

भारतीय अस्पतालों में जहां बीमार लोग नया जीवन पाने के लिए जाते हैं, समय-समय पर होने वाले अग्निकांडों से जान-माल की भारी क्षति हो रही है जिसकी पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान अस्पतालों में अग्निकांडों और मौतों की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 2 मई,...
भारतीय अस्पतालों में जहां बीमार लोग नया जीवन पाने के लिए जाते हैं, समय-समय पर होने वाले अग्निकांडों से जान-माल की भारी क्षति हो रही है जिसकी पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान अस्पतालों में अग्निकांडों और मौतों की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 2 मई, 2025 को ‘कोझिकोड’ (केरल) के ‘गवर्नमैंट मैडीकल कालेज तथा अस्पताल’ के यू.पी.एस. रूम में शार्ट सॢकट होने के कारण लगी आग के परिणामस्वरूप 5 रोगियों की मौत हो गई।
* 9 अगस्त, 2025 को ‘दिल्ली’ के ‘कॉसमास अस्पताल’ में लगी आग बुझाने के दौरान अस्पताल के एक कर्मचारी की मौत हो गई।
* 6 अक्तूबर, 2025 को ‘जयपुर’ (राजस्थान) के ‘सवाई मान सिंह अस्पताल’ के ट्रामा सैंटर में शार्ट सॢकट के कारण लगी आग के परिणामस्वरूप 8 मरीजों की झुलसने से मौत हो गई।
* 16 मार्च, 2026 को ‘कटक’ (ओडिशा) के ‘एस.सी.बी. मैडीकल कॉलेज और अस्पताल’ में तड़के लगभग अढ़ाई बजे अस्पताल के ‘ट्रॉमा’ वार्ड की पहली मंजिल पर भीषण आग लग जाने के कारण दम घुटने और झुलसने से वहां उपचाराधीन 12 मरीजों की मौत हो गई तथा मरीजों को बचाते समय 11 अस्पताल कर्मी भी घायल हो गए।
* 20 मई, 2026 को ‘देहरादून’ (उत्तराखंड) स्थित एक अस्पताल में लगी आग के परिणामस्वरूप वहां उपचाराधीन रोगियों से भरा एक कमरा धुएं से भर गया तथा एक महिला की जिंदा जल कर मौत हो गई।
* 2 जून, 2026 को ‘चंडीगढ़’ स्थित ‘सरकारी मल्टी स्पैशलिटी अस्पताल’ के ब्लड बैंक के पीछे लगे हुए एयर कंडीशनिंग यूनिट में शॉर्ट सर्किट हो जाने के कारण आग लग गई परंतु समय रहते आग पर काबू पा लिया गया।
* 4 जून, 2026 को ‘मुजफ्फरपुर’ (बिहार) स्थित ‘प्रसाद अस्पताल’ के आई.सी.यू. में तड़के लगभग 4 बजे आग लग जाने के परिणामस्वरूप धुएं में दम घुटने से 9 मरीजों की मौत हो गई तथा 15 से अधिक झुलस गए।
* 10 जून, 2026 को ‘मुजफ्फरपुर’ के ही ‘श्री कृष्ण मैडीकल कालेज तथा अस्पताल’ के सुपर स्पैशलिटी ब्लाक के एग्जास्ट फैन में आग लग जाने से अफरा-तफरी मच गई लेकिन समय रहते ही आग पर काबू पा लिया गया।
* 28 जुलाई, 2026 को ‘रायपुर’ (छत्तीसगढ़) स्थित ‘अंबेडकर अस्पताल’ के एमरजैंसी वार्ड में आग लग गई। किसी तरह अस्पताल के प्रबंधन ने एमरजैंसी और अन्य वार्डों के मरीजों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
* और अब 4 अगस्त, 2026 को सुबह के समय ‘जालंधर’ (पंजाब) के ‘सिविल अस्पताल’ के जच्चा-बच्चा वार्ड के एक कमरे में लगे एयर कंडीशनर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग और धुएं ने पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और सुरक्षा कर्मियों की टीमों ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी मरीजों और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। बिजली की खपत और ‘लोड’ के अनुसार वायरिंग अपग्रेड न होने से शार्ट सॢकट होने के अलावा एयर कंडीशनरों में खराबी, आग बुझाने वाले यंत्रों का काम न करना, वैंटीलेटर जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों में खराबी पैदा होना आदि आग लगने के मुख्य कारण माने जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि अधिकांश अस्पतालों को कोरोना के समय आक्सीजन प्लांट लगाने के लिए क्षमता से अधिक लोड दिया गया था जिसे बाद में रैगुलेट नहीं किया गया और न ही उसकी मैंटेनैंस हो रही है जो दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। अत: ड्यूटी के समय अस्पताल कर्मचारियों के सचेत रहने, किसी भी खराबी के लिए सम्बन्धित कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय करने, बिजली आदि के उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के अलावा अस्पतालों के स्टाफ को आग से बचाव की समय-समय पर ट्रेङ्क्षनग देने तथा ऐसी मौतों के लिए जिम्मेदार स्टाफ के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। —विजय कुमार