Edited By ,Updated: 17 Mar, 2026 05:42 AM

आज इंटरनैट के जमाने में हर चीज मोबाइल फोन पर उपलब्ध होने के कारण सोशल मीडिया का महत्व बहुत बढ़ गया है और लोग बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जहां उपयोगी जानकारी मिलती है वहीं इस पर उपलब्ध अनुचित और अश्लील सामग्री बच्चों के लिए हानिकारक...
आज इंटरनैट के जमाने में हर चीज मोबाइल फोन पर उपलब्ध होने के कारण सोशल मीडिया का महत्व बहुत बढ़ गया है और लोग बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जहां उपयोगी जानकारी मिलती है वहीं इस पर उपलब्ध अनुचित और अश्लील सामग्री बच्चों के लिए हानिकारक भी सिद्ध हो रही है।स्कूल हो या घर, हर जगह बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल करते रहते हैं। सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल रहा है और बच्चों में नींद की कमी भी देखी गई है। यह बच्चों में डिप्रैशन, ङ्क्षचता और तनाव उत्पन्न करने का कारण भी बन रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है तथा माता-पिता के साथ उनकी दूरी एवं स्वभाव में हिंसक प्रवृत्ति बढऩे के साथ-साथ एकाग्रता में कमी आ रही है। सोशल मीडिया की लत से बच्चों को बचाने की खातिर आस्ट्रेलिया, इंगलैंड, मलेशिया, स्पेन, नार्वे, जर्मनी, इटली व चीन तथा चंद अन्य देशों ने भी बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इसी सिलसिले में फ्रांस सरकार ने भी 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की कवायद शुरू कर दी है। देश की नैशनल असैम्बली ने इससे संबंधित बिल को स्वीकृति दे दी है। इसे देश में 1 सितम्बर, 2026 से शुरू होने वाले आगामी शिक्षा सत्र से लागू कर दिया जाएगा। फ्रांस के राष्ट्रपति ‘इमैनुएल मैक्रों’ का कहना है कि ‘‘हमारे बच्चों के दिमाग बिकाऊ नहीं हैं। बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत को उन कम्पनियों के भरोसे पर नहीं छोड़ा जा सकता जिनका उद्देश्य सिर्फ लाभ कमाना है।’’ ‘डेनमार्क’ की प्रधनामंत्री ‘मेटे फ्रैडिरकसन’ ने भी कहा है कि,‘‘हमने एक राक्षस को जन्म दिया है जो बच्चों से उनका बचपन छीन रहा है।’’
पिछले कुछ समय से भारत में नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया पर अश्लील और हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री देख कर बलात्कार जैसी वारदातें करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं जिनकी पिछले 6 महीनों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 23 अक्तूबर, 2025 को ‘जोधपुर’ (राजस्थान) में 3 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने के आरोप में पुलिस ने एक किशोर को गिरफ्तार किया। आरोपी के मोबाइल की जांच करने से पता चला कि उसने वारदात करने से पहले 15-20 अश्लील वीडियो देखे थे।
* 6 फरवरी, 2026 को ‘बदायूं’ (उत्तर प्रदेश) के ‘दातागंज’ में 8 और 14 साल की उम्र के 2 लड़कों को मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखने के बाद एक 6 साल की बच्ची से सामूहिक बलात्कार करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया।
* 13 फरवरी, 2026 को ‘रीवा’ (मध्य प्रदेश) में कुरकुरे दिलवाने के बहाने अपनी 6 वर्षीय बहन से बलात्कार करने के आरोप में एक 14 वर्षीय नाबालिग को पुलिस ने हिरासत में लिया।
* 7 मार्च, 2026 को हाथरस (उत्तर प्रदेश) में जंगल में चारा लेने गई चौथी क्लास की छात्रा को मोबाइल फोन पर अश्लील सामग्री देखने के आदी 2 लड़के बेर देने अपने साथ ले गए और उससे बलात्कार कर डाला। दोनों लड़कों को पुलिस ने पकड़ लिया है।
ऐसी ही घटनाओं के दृष्टिïगत 6 मार्च, 2026 को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की सरकारों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है और ऐसा कदम उठाने वाले ये देश के पहले 2 राज्य बन गए हैं। ‘तेलुगू देशम पार्टी’ (तेदेपा) के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार के अनुसार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित रहेगा, वहीं पड़ोसी राज्य कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने कहा है कि यह प्रतिबंध 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लागू होगा। आंध्र व कर्नाटक सरकारों द्वारा उक्त प्रतिबंध लगाने से बच्चों के चारित्रिक पतन को किसी सीमा तक रोकने में सहायता मिलेगी। अत: सभी राज्यों में इस तरह के कानून को तुरंत सख्तीपूर्वक लागू करने और उस पर अमल सुनिश्चित करवाने की जरूरत है, ताकि बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।—विजय कुमार