Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 May, 2026 11:31 AM

कच्चे तेल और विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय एविएशन सेक्टर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ती लागत के दबाव में Air India रोजाना करीब 100 उड़ानें कम करने की तैयारी में है। यह कटौती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट्स पर होगी,
बिजनेस डेस्कः कच्चे तेल और विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय एविएशन सेक्टर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ती लागत के दबाव में Air India रोजाना करीब 100 उड़ानें कम करने की तैयारी में है। यह कटौती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट्स पर होगी, खासकर जून में यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर रूट्स प्रभावित होंगे। एयर इंडिया रोजाना करीब 1,100 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है।
एयरलाइंस ने सरकार से मांगी मदद
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA), जिसमें IndiGo, Air India और SpiceJet शामिल हैं, ने सरकार से राहत की मांग की है। उनका कहना है कि ATF की ऊंची कीमतें इंडस्ट्री को गंभीर संकट की ओर धकेल रही हैं।
जेट फ्यूल महंगा, लागत पर भारी असर
दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमत मार्च के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है। वैश्विक स्तर पर भी कीमतें तेज हैं—अप्रैल के अंत तक औसतन 179 डॉलर प्रति बैरल, जो फरवरी से करीब 80% ज्यादा है। एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट में ATF की हिस्सेदारी करीब 40% तक होती है, जिससे मामूली बढ़ोतरी भी मुनाफे को प्रभावित करती है।
एयर इंडिया पर ज्यादा असर क्यों?
एयर इंडिया पर असर ज्यादा पड़ रहा है क्योंकि इसकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का हिस्सा बड़ा है। पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन और क्रू लागत बढ़ गई है। कुछ फ्लाइट्स को वियना और स्टॉकहोम में रुकना पड़ रहा है।
घाटे का दबाव और प्रबंधन चुनौती
कंपनी का घाटा पहले ही 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। Tata Group और सिंगापुर एयरलाइन्स पर इसे कम करने का दबाव है। इस बीच, कंपनी के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने का फैसला किया है।