Edited By Ramanjot,Updated: 24 Sep, 2026 01:32 PM

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग में रिन्यूएबल एनर्जी समाधानों, दोनों के लिए कई रास्ते अपनाने वाला तरीका अपनाया है।
पंचकूला: मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने हरियाणा के मानेसर प्लांट में अपना पहला 300 kW का ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट शुरू किया है। यह कदम कंपनी की साफ-सुथरी मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा की ओर बढ़ने की दिशा में एक अहम कदम है। एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किए गए इस प्लांट में ग्रीन हाइड्रोजन बनाई जाएगी। इसे नेचुरल गैस के साथ मिलाकर कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस पहल का मकसद मानेसर प्लांट में बनने वाली अतिरिक्त सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करना है, खासकर छुट्टियों के दौरान जब बिजली का इस्तेमाल नहीं हो पाता। इस अतिरिक्त सोलर एनर्जी को ग्रीन हाइड्रोजन में बदलकर, मारुति सुजुकी का मकसद इसे बाद में मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल के लिए स्टोर करना है, ताकि उसकी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का ज़्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सके। यह प्रोजेक्ट पैरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन की 'शो-शो-केई-तान-बी' (Sho-Sho-Kei-Tan-Bi) की मुख्य सोच से प्रेरित है, जिसका मतलब है - छोटा, कम, हल्का, संक्षिप्त और ज़्यादा सुंदर। गुरुवार को जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि यह तरीका उसके सभी कामों में रिसोर्स की क्षमता को बेहतर बनाने और ऊर्जा की खपत को सही ढंग से इस्तेमाल करने की कोशिशों में मदद करता है।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग में रिन्यूएबल एनर्जी समाधानों, दोनों के लिए कई रास्ते अपनाने वाला तरीका अपनाया है। उन्होंने कहा कि 300 kW के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की शुरुआत भारत सरकार के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। ताकेउची ने कहा, "सोलर, बायोगैस के विस्तार और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने के साथ-साथ, यह साफ-सुथरे और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों की ओर बढ़ने के हमारे संकल्प को दिखाता है।" उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे भारत एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस के तौर पर उभर रहा है, उसकी कॉम्पिटिटिव बढ़त न सिर्फ़ लागत और क्वालिटी पर, बल्कि कार्बन इंटेंसिटी पर भी निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, "ऐसी पहलों के जरिए हम आज ऐसी क्षमता बना रहे हैं ताकि हम भविष्य में कम कार्बन और ज्यादा ऊर्जा-कुशल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को सपोर्ट कर सकें।"
मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2030-31 तक अपने मैन्युफैक्चरिंग कार्बन फुटप्रिंट को मौजूदा 615,000 टन से घटाकर 266,000 टन करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है। ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट के अलावा, कंपनी अपनी क्लीन एनर्जी स्ट्रैटेजी के जरिए अपने मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिशें तेज कर रही है। इसमें कंपनी का अपना सोलर पावर प्लांट लगाना, सरकारी स्रोतों से रिन्यूएबल एनर्जी खरीदना और सोलर व विंड पावर के लिए थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स के साथ समझौते करना शामिल है।