1984 सिख विरोधी दंगे : 37 साल बाद योगी से जगी न्याय की आस

Edited By , Updated: 24 Jun, 2022 05:07 AM

1984 anti sikh riots after 37 years the hope of justice arose from yogi

नवम्बर 1984 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में मारे गए 127 सिखों के कातिलों को पकडऩे के लिए राज्य की एस.आई.टी. ने धरपकड़ तेज कर दी है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित

नवम्बर 1984 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में मारे गए 127 सिखों के कातिलों को पकडऩे के लिए राज्य की एस.आई.टी. ने धरपकड़ तेज कर दी है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका में एक आर.टी.आई. के हवाले से बताया गया था कि यू.पी. के कानपुर में हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों में 127 सिखों के मारे जाने का आधिकारिक रिकार्ड है और इस मामले में कई एफ.आई.आर. भी दर्ज हुई हैं। 

इतने वर्षों बाद भी एक आरोपी नहीं पकड़ा गया। इसलिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए यू.पी. पुलिस की एस.आई.टी. बनाई जाए, या इन मामलों की जांच सी.बी.आई. को सौंपी जाए। इस मांग को लेकर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. तथा अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल ने संयुक्त तौर पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस को एस.आई.टी. बनाने का निर्देश दिया था। 

योगी आदित्यनाथ ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए 6 महीने का समय देकर 5 फरवरी, 2019 को एस.आई.टी. बनाई थी, जिसके द्वारा की गई विवेचना के बाद यह बात सामने आई कि इस मामले में कई गवाह कानपुर छोड़कर जा चुके हैं और पंजाब में रहते हैं और आरोपियों को पकडऩे के लिए सारे सबूतों के साथ गवाहों के बयान लेना जरूरी है। इसके बाद एस.आई.टी. की मियाद 6-6 महीने बढ़ती रही और आखिरी मियाद 31 मई, 2022 को खत्म हो गई। इस दौरान सरकार को सफलता हाथ नहीं लगी, लिहाजा यू.पी. सरकार ने 6 महीने और विस्तार देकर इसे नवम्बर 2022 तक बढ़ा दिया। 

इस जून महीने में अभी तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि 65 लोगों की आरोपियों के तौर पर निशानदेही की गई है। यू.पी. पुलिस की एस.आई.टी. द्वारा लगातार आरोपियों को पकडऩे की हो रही कोशिश के बाद सिख नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया है। साथ ही उम्मीद जताई है कि 37 साल बाद कानपुर दंगा पीड़ितों में न्याय मिलने की आस जग गई है। 

बाबा बंदा सिंह बहादुर को राष्ट्रीय पटल पर पेश करने की तैयारी : पहले सिख जनरैल बाबा बंदा सिंह बहादुर के शहीदी स्थान को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की कवायद तेज हो गई है। 25 जून को बाबा बंदा सिंह बहादुर के शहीदी दिवस पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा महरौली में कीर्तन दरबार का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बाबा बंदा सिंह बहादुर सिख संप्रदाय भारत और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का भी संयुक्त सहयोग है। 

इस बीच दिल्ली कमेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में राष्ट्रीय राजधानी में एक विश्व स्तरीय संग्रहालय स्थापित करने की गुहार लगाई है, जिससे आने वाली पीढिय़ां देश के लिए डाले गए उनके योगदान से परिचित हो सकेंगी। इसके अलावा बाबा बंदा सिंह बहादुर के बारे में स्कूलों-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में अध्याय शामिल करने की भी अपील की गई है, ताकि बच्चे उनकी बहादुरी से प्रेरणा ले सकें। 

प्रधानमंत्री मोदी से गुहार, बंदी सिखों को रिहा करे सरकार : शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह से अपील की है कि उम्र कैद की सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों को तत्काल रिहा किया जाए। सरना ने डेरा सच्चा सौदा के मुखी गुरमीत राम रहीम को पैरोल का हवाला देते हुए गुहार लगाई है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि देश में 2 प्रकार के कानून चल रहे हैं। एक वे जो सरकारों से संबंध रखते हैं और दूसरे वे जो 25 वर्षों से सलाखों के पीछे बंद हैं मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। सरना के मुताबिक वह देश की कानून व्यवस्था पर कोई सवाल नहीं उठा रहे, पर सिखों के दिलों में इस बात को लेकर रोष है कि जिन बंदी सिखों की रिहाई की लड़ाई वह लड़ रहे हैं, उसके बारे में कोई सुनवाई नहीं हो रही। 

अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों की छात्रवृत्ति पर संकट : अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित दिल्ली के पब्लिक स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों को 100 फीसदी ट्यूशन फीस छात्रवृत्ति के तौर पर दी जाती है। अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं के तहत पिछले कई सालों से हजारों छात्र इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन शिक्षण सत्र 2020-21 और 2021-22 के लिए आवेदन करने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के आवेदन रोक दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित सभी छात्रों के आवेदनों की पुन: विवेचना के आदेश दिए हैं। संबंधित स्कूलों से पुष्टि होने के बाद विद्यार्थी के बैंक खाते में 100 फीसदी ट्यूशन फीस वापस आ जाती है, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि संबंधित स्कूलों द्वारा प्रमाणित करने के बावजूद सरकार ने आवेदन रोक दिए हैं। इस योजना के तहत करीब 7000 बच्चों के आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं।-दिल्ली की सिख सियासत सुनील पांडेय        
 

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