Edited By ,Updated: 10 Jun, 2026 04:32 AM

विशेषज्ञ लंबे समय से यह सोच रहे थे कि क्या फोन ने जन्म दर में गिरावट में कोई भूमिका निभाई है, जो 2007 में शुरू हुई थी, उसी वर्ष, जब एप्पल ने आईफोन पेश किया था लेकिन अब तक इसे साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था। दो नए शोध पत्र, जिनमें से एक गत...
विशेषज्ञ लंबे समय से यह सोच रहे थे कि क्या फोन ने जन्म दर में गिरावट में कोई भूमिका निभाई है, जो 2007 में शुरू हुई थी, उसी वर्ष, जब एप्पल ने आईफोन पेश किया था लेकिन अब तक इसे साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था। दो नए शोध पत्र, जिनमें से एक गत सोमवार को और दूसरा मई में प्रकाशित हुआ, पहले ऐसे शैक्षणिक प्रयास हैं, जो यह जांचते हैं कि क्या स्मार्टफोन इसका एक कारण था?
ये पिछले 20 वर्षों में अमरीका और अन्य देशों में प्रजनन दर में आई व्यापक गिरावट को समझाने के सबसे हालिया प्रयास हैं। शोधकत्र्ता पहले ही गर्भनिरोधक के उपयोग, गर्भपात की दरों, महिलाओं के शिक्षा स्तर में वृद्धि और यहां तक कि लोकप्रिय टैलीविजन शो ‘16 एंड प्रैग्नैंट’ पर भी गौर कर चुके हैं। यह साबित करना कि फोन के कारण यह गिरावट आई है, एक जटिल काम है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के लिए सबसे बेहतरीन पैमाना ‘रैंडम असाइनमैंट’ के रूप में जाना जाता है। यह उन लोगों के परिणामों की तुलना करता है जिन्हें बेतरतीब ढंग से कोई ट्रीटमैंट (जैसे स्मार्टफोन मिलना) देने के लिए चुना जाता है, उन लोगों से जिन्हें वह नहीं मिलता।
लेकिन घटती प्रजनन दर के कारणों का पता लगाने के मामले में ऐसा करना संभव नहीं है। इसलिए शोधकत्र्ताओं ने स्मार्टफोन के बारे में ऐसा डाटा तलाशा, जो इसमें रैंडमनैस लाता हो। मिडिलबरी कॉलेज की अर्थशास्त्री कैटिलिन मायर्स और उनके छात्र एजेकिएल हूपर ने प्रजनन क्षमता पर फोन के प्रभावों को अलग करने के लिए आईफोन के शुरुआती दौर के असमान और बिखरे हुए रोलआऊट (शुरुआत) का उपयोग किया। उन्होंने लिखा कि पहला आईफोन जून, 2007 में जारी किया गया था और यह फरवरी 2011 तक केवल ्रञ्ज&ञ्ज नैटवर्क पर ही उपलब्ध था। इस अध्ययन ने उन अमरीकी काऊंटियों में प्रजनन दरों की तुलना की, जहां लगभग हर जगह AT&T का कवरेज था, उन काऊंटियों से जहां यह कवरेज बहुत कम या बिल्कुल नहीं था।
नैशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में प्रकाशित उनके पेपर में पाया गया कि आईफोन 2007 और 2011 के बीच फॢटलिटी में आई गिरावट के आधे हिस्से तक की वजह बना। सबसे स्पष्ट प्रभाव 15 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं में देखे गए। आईफोन वाली काऊंटियों में क्या हुआ? प्रोफैसर मायर्स ने कहा कि एक सिद्धांत यह है कि युवाओं ने अपने फोन पर अधिक और व्यक्तिगत रूप से कम मेलजोल बढ़ाना शुरू कर दिया तथा इसके परिणामस्वरूप उनके संबंध बनाने और गर्भवती होने की संभावना कम हो गई। प्रोफैसर मायर्स ने कहा कि आईफोन ने पोर्नोग्राफी को भी अधिक सुलभ बना दिया होगा, जिससे युवाओं ने इसे यौन संबंध के विकल्प के रूप में अपना लिया, या युवाओं ने गर्भधारण से बचने के लिए बेहतर जानकारी प्राप्त करने हेतु इसका उपयोग किया हो सकता है, जिसमें गर्भनिरोधक और गर्भपात शामिल हैं। इस अध्ययन में शामिल नहीं रहे शोधकत्र्ताओं ने कहा कि ये परिणाम ठोस और आश्वस्त करने वाले थे।
घटती जन्म दर, जो कभी अमीर समाजों की विशेषता हुआ करती थी, अब एक लगभग वैश्विक घटना है। इस गिरावट के व्यापक प्रसार ने शोधकत्र्ताओं को इसके सामान्य चालकों की तलाश करने पर मजबूर कर दिया है। दूसरे अध्ययन के लेखकों ने भी स्मार्टफोन पर गौर करने का फैसला किया। यूनिवॢसटी ऑफ सिनसिनाटी में अर्थशास्त्र के प्रोफैसर हरनान मोस्कोसो बोएदो और पीएच.डी. छात्र नाथन हडसन ने 128 देशों में स्मार्टफोन की पहुंच और किशोर प्रजनन दरों को मापने वाले विश्व बैंक के आंकड़ों का विश्लेषण किया। मैक्सिको, तुर्की, ईरान, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला और चिली जैसे विविध देशों में, उन्होंने पाया कि स्मार्टफोन के एक व्यापक जन-साधन बनने के बाद किशोर प्रजनन दर में गिरावट तेज हो गई।
बारूक कॉलेज के अर्थशास्त्री थियोडोर जॉयस दोनों अध्ययनों को लेकर संशय में हैं। उन्होंने कहा कि किशोरों के जन्म की संख्या 1990 के दशक से ही गिर रही है, जो तकनीक के परिदृश्य में आने से बहुत पहले की बात है। उन्होंने कहा कि प्रोफैसर मायर्स के पेपर ने उस छोटी अवधि की जांच की, जब स्मार्टफोन पूरी तरह से बाजार में नहीं पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यह परिकल्पना सही हो सकती है लेकिन ‘अभी भी काल्पनिक बनी हुई है।’-सबरीना टैवर्नीस