‘अग्निपथ’: देश की सुरक्षा व युवाओं का भविष्य दाव पर

Edited By Updated: 02 Jul, 2022 06:57 AM

agneepath  country s security and youth s future at stake

देशभक्ति  पथ पर आगे बढऩे का एक युवा का जज्बा ‘अग्निपथ’ ने कमजोर कर दिया है। 4 साल की अल्प नौकरी के बाद अपने और परिवार के भविष्य की चिंता में घिरा रहने वाला जवान देश की सुरक्षा जैसे संवेदनशील कृत्य को मजबूत मनोबल और निष्ठा से कैसे निभा पाएगा? फौज में...

देशभक्ति  पथ पर आगे बढऩे का एक युवा का जज्बा ‘अग्निपथ’ ने कमजोर कर दिया है। 4 साल की अल्प नौकरी के बाद अपने और परिवार के भविष्य की चिंता में घिरा रहने वाला जवान देश की सुरक्षा जैसे संवेदनशील कृत्य को मजबूत मनोबल और निष्ठा से कैसे निभा पाएगा? फौज में भर्ती होने वाले 70 फीसदी से अधिक युवा धरती पुत्र किसान की संतान हैं।

फौज में अग्निपथ जैसी 4 साल की ठेका भर्ती स्कीम से किसान परिवारों के युवाओं का भविष्य दाव पर लगाने का यह फैसला भी 3 कृषि कानून की तरह केंद्र सरकार को जल्द वापस लेना चाहिए। अन्नदाता परिवारों के युवाओं की देश की सीमाओं का रक्षादाता बनने की भावना का सम्मान करते हुए सरकार देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य की चिंता करे। मनमानी छोड़ सरकार युवाओं के मन की भी सुने। 

चार साल के बाद जिन 75 फीसदी ‘अग्निवीरों’ की फौज से छुट्टी हो जाएगी उन्हें राज्य सरकार, केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और कॉर्पोरेट सैक्टर में नौकरी का झांसा दिया जा रहा है। जबकि केंद्र सरकार के ही आंकड़े बयां करते हैं कि 15 साल फौज में रह कर रिटायर हुए फौजियों को सरकारी नौकरियों में 10 से 25 फीसदी आरक्षण के प्रावधान के बावजूद 2 फीसदी से भी कम को नौकरी दी गई।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों की पेशकश की है जबकि राज्य के पूर्व सैनिकों को तय आरक्षण के अनुपात में बहुत कम नौकरियां दी गईं। क्या हरियाणा सरकार अग्निवीरों को भर्ती के समय ही एडवांस नियुक्ति पत्र देगी? फौज से 4 साल बाद लौटने के बाद क्या 75 फीसदी अग्निवीर पहले ही दिन से हरियाणा में सरकारी नौकरी करने लगेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार फौज में भर्ती के साथ ही अग्निवीरों को हरियाणा में नौकरी के नियुक्ति पत्र एडवांस में जारी करे। 

हरियाणा में पीढ़ी दर पीढ़ी फौजी जवानों का देश रक्षा के लिए समर्पित होने का लंबा इतिहास रहा है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल हरियाणा की धरती से ही बजा था। ‘जय जवान,जय किसान’ की भावना से खेतों में अपने पसीने से देश की खाद्य सुरक्षा सींचता किसान का फौजी बेटा सरहदों पर माइनस डिग्री तापमान में देश की सुरक्षा ढाल बनता है। पर कोरोना काल के चलते 3 साल से रुकी फौज की पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया अग्निपथ की भेंट चढ़ गई है। 3 साल तक भर्तियां बंद रहने की वजह से फौज में करीब 2 लाख से ज्यादा पद खाली हैं। 

अग्निपथ भर्ती स्कीम से देश की फौज भी आधी रह जाएगी। अभी तक हर साल फौज में 60 से 80 हजार भर्तियां होती थीं, अब अग्निपथ योजना में हर साल करीब 45 हजार भर्ती होगी, जिसमें से 75 फीसदी अग्निवीरों को 4 साल बाद सेवामुक्त किए जाने से अगले 15 साल में देश की करीब 14 लाख की फौज की संख्या घटकर आधी से भी कम रह जाएगी। सालभर में हरियाणा से करीब 5000  फौजियों की भर्ती अग्निपथ की चपेट में घटकर एक हजार से भी कम रह जाएगी। इसमें से भी अढ़ाई सौ जवान 4 साल की सेवा के बाद फौज में आगे रह पाएंगे। अग्निपथ भर्ती प्रक्रिया से सीमाओं पर फौज की बजाय देशभर में बेरोजगारों की फौज बढऩा तय है। 

आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं : पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार के विभागों में ग्रुप-सी में और ग्रुप-डी में 24 फीसदी तक आरक्षण का प्रावधान पूर्व सैनिकों के लिए है। इसमें केंद्र सरकार के 77 विभागों में से 34 में ग्रुप-सी की 10,84,705 भॢतयों में से सिर्फ  13,976 यानी 1.29 फीसदी और ग्रुप-डी में 3,25,265 आरक्षित नौकरियों में से 8,642 यानी 2.66 फीसदी पर ही पूर्व सैनिकों की भर्ती की गई है। 

सी.ए.पी.एफ. व सी.पी.एम.एफ. में सहायक कमांडैंट के स्तर तक सीधी भर्ती में भूतपूर्व सैनिकों के लिए 10 फीसदी कोटे में से केवल 0.47 फीसदी और ग्रुप-बी में 0.87 फीसदी,ग्रुप-ए में 2.20 फीसदी पूर्व सैनिकों की भर्ती की गई। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में पूर्व सैनिकों के लिए ग्रुप-सी में 14.5 फीसदी पदों में और ग्रुप-डी के 24.5 फीसदी आरक्षित पदों में ग्रुप-सी में 1.15 फीसदी और ग्रुप-डी में मात्र 0.3 फीसदी पूर्व सैनिकों को भर्ती मिल पाई। आंकड़ों से साफ है कि फौज की 4 साल की सेवा के बाद अग्निवीरों को दूसरे सरकारी विभागों में नौकरी मिलना संदेह के घेरे में हैं। 

रक्षा बजट में कटौती : अग्निपथ योजना को लाने के पीछे देश के रक्षा बजट में की गई कटौती के चलते वेतन, पैंशन का पैसा बचाने की कवायद है। 2017-18 में केंद्र सरकार का रक्षा बजट देश के कुल बजट का 17.8 फीसदी था जो 2020-21 में 13.2 फीसदी और 2022-23 के लिए 13 फीसदी यानी 5,25,166 करोड़ रुपए रह गया है जिसमें 70 फीसदी से अधिक तीनों सेनाओं के वेतन,पैंशन,भत्तों व रियायतों पर होने वाला खर्च शामिल है। 

देश की सुरक्षा के लिए फौज से बड़ा कुछ नहीं है। इसलिए रूस अपनी जी.डी.पी. का 4.3 फीसदी, अमरीका 3.7,पाकिस्तान 4 फीसदी देश की सुरक्षा के लिए सैन्य सेवाओं पर खर्च करता है जबकि भारत का सैन्य सेवाओं पर खर्च जी.डी.पी. का सिर्फ 2.9 फीसदी है। ऐसे संवेदनशील समय में रक्षा  बजट में कटौती से अग्निपथ जैसी भर्ती स्कीम लागू की जा रही है जब देश की सीमाओं पर चीन और पाकिस्तान घात लगाए बैठे हैं।-भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व मुख्यमंत्री,हरियाणा

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