परिवार के बिना जान के जोखिम में बुजुर्ग

Edited By Updated: 28 Jul, 2026 06:34 AM

elderly people are at risk without family

प्रतिदिन  बहुत-से अखबार पढ़ती हूं। सोशल मीडिया पर भी पढऩे को काफी सामग्री होती है।  पिछले दिनों एक घटना पढ़कर हिल गई। एक सज्जन अपनी पत्नी के साथ मुजफ्फरपुर, बिहार में रहते थे। वह एक बैंक से कैशियर के पद से रिटायर हुए थे। उनका बेटा निखिल बेंगलुरु में...

प्रतिदिन बहुत-से अखबार पढ़ती हूं। सोशल मीडिया पर भी पढऩे को काफी सामग्री होती है।  पिछले दिनों एक घटना पढ़कर हिल गई। एक सज्जन अपनी पत्नी के साथ मुजफ्फरपुर, बिहार में रहते थे। वह एक बैंक से कैशियर के पद से रिटायर हुए थे। उनका बेटा निखिल बेंगलुरु में नौकरी करता है। बेटे ने घर के सी.सी.टी.वी. को मोबाइल से जोड़ रखा था और समय-समय पर माता-पिता के हाल-चाल देखता रहता था। एक शाम 4 बजे, उसने मोबाइल पर देखा कि उसके पिता गिरे पड़े हैं और मां सीढ़ी की तरफ भाग रही है। उसने उनके मोबाइल पर फोन किया लेकिन वे स्विच्ड ऑफ थे।  लड़का घबरा गया। उसने अपने पड़ोसी अमित को फोन करके कहा कि उसके घर जाकर देखे। माता-पिता पर किसी ने हमला कर दिया है। 3-4 लोग घर में दिखाई दे रहे हैं।

पड़ोसी अमित कुछ अन्य पड़ोसियों के साथ घर पहुंचा तो देखा कि निखिल के पिता पहली मंजिल  पर पड़े थे। उन पर अनेक बार चाकू से हमला किया गया था। मृत्यु हो चुकी थी। पिता की कुछ दिन पहले ही बाईपास सर्जरी हुई थी। उन्हें स्वास्थ्य की अन्य परेशानियां भी थीं। बुजुर्ग भी थे। ऐसे में हत्यारों का मुकाबला करते भी तो कैसे। बुजुर्ग 4 भाई थे। 2 की कुछ दिन पहले ही मृत्यु हुई थी। भाइयों के चले जाने से भी वह परेशान रहते थे लेकिन पूछने पर कभी कुछ नहीं बताते थे। फिर पड़ोस के लोग निखिल की मां को ढूंढने लगे। ऊपर वह भी मरी हुई मिली। उनके हाथ बंधे हुए थे। और उनके मुंह पर टेप लगा था। गमछे से गला घोंटा गया था। 

पड़ोसियों ने वापस बेंगलुरु में निखिल को फोन किया। पुलिस को भी बुलाया। घर में रहने वाली एक और किराएदार ने ही पुलिस को सूचना दी कि बुजुर्गों ने दूसरी मंजिल पर 4 दिन पहले एक लड़के को किराएदार रखा था। सामान के नाम पर वह लड़का अपने साथ एक बैग और एक सिलैंडर ही लाया था। एक बार आने के बाद वह दोबारा आया। पीने का पानी मांगा, फिर किसी को दिखाई नहीं दिया। महिला किराएदार ने यह भी कहा कि शाम साढ़े 5 बजे आंटी पानी भरने के लिए मोटर चलाती थीं। आज नहीं आईं तो आवाज भी लगाई लेकिन वह नहीं आईं। सी.सी.टी.वी. में वह किराएदार भागते भी दिखाई दे रहा था। किराएदार को ढूंढने पर वह कहीं नहीं मिला। उसका सामान भी गायब था। दम्पति के मोबाइल फोन भी गायब थे। बेटे निखिल ने बताया कि किराएदार ने अपना आधार कार्ड भी उसके पिता को दिया था लेकिन वह कहीं नहीं मिला। बुजुर्गों की बेटी ने कहा कि उसके माता-पिता की किसी से दुश्मनी भी नहीं थी।

इन दिनों पुलिस कहती है कि कोई भी किराएदार रखने से पहले पुलिस वैरीफिकेशन करा ली जाए। क्या किराएदार का पुलिस वैरीफिकेशन नहीं कराया था? यदि कराया होता तो शायद ये बुजुर्ग दम्पति बच जाते। हालांकि यह भी सच है कि लोग पुलिस के पास जाने से बचते हैं। इसके अलावा यदि पुलिस से वैरीफिकेशन करा भी लें, तो पुलिस हर वक्त तो कहीं मौजूद नहीं रह सकती। वह भी किसी घटना-दुर्घटना के हो जाने के बाद ही पहुंचती है। हां, किराएदार की जानकारी जरूर पलक झपकते ही मिल सकती थी। भागने पर भी उसकी जल्द पहचान हो जाती। पूरी घटना से यह बात भी सामने आती है कि जरूर उस लड़के ने अपराध की मंशा से ही बुजुर्गों का मकान किराए पर लिया होगा। पहले ही रेकी कर ली होगी कि बूढ़े पति-पत्नी अकेले रहते हैं। बच्चे उनके साथ नहीं रहते। वर्ना तो वह अपने वे  कागजात समेटकर क्यों भागता, जो उसने मकान मालिक को दिए थे। 

कुल मिलाकर यह भी कि चाहे जितने सी.सी.टी.वी. लगा दो, अगर घर में बच्चों और परिवार के दूसरे सदस्यों का सहारा नहीं, तो बुजुर्ग असुरक्षित ही हैं। सी.सी.टी.वी. से आप दूर बैठे यही देख सकते हैं कि घर में क्या हो रहा है लेकिन अपराध होते दिखे भी, तो उसे रोक नहीं सकते, जैसा कि निखिल के साथ हुआ। जिसे ह्यूमन रिसोर्स कहते हैं, उसकी जरूरत हमेशा रहती है। जबकि इन दिनों छोटे परिवारों के कारण उसकी भारी कमी है। एक समय में जब संयुक्त परिवार था, बड़े-बड़े कुनबे होते थे, तब ऐसे अपराधों को अंजाम देना मुश्किल होता था। आज 1-2 बच्चों वाले परिवार हैं। पढ़-लिखकर बच्चे अपनी राह लेते हैं। कभी-कभार ही आ पाते हैं। ऐसे में अपनी सुरक्षा के उपाय खुद ही करने पड़ते हैं।

वैसे कहते हैं कि देश में हजारों फ्लैट और घर खाली पड़े हैं। अगर मकान मालिक इन्हें किराए पर दें तो आवास की समस्या हल हो सकती है। वैसे भी अनेक युवा कहते हैं कि घर इतने महंगे हैं कि वे खरीद ही नहीं सकते। लेकिन इसका क्या करें कि अगर मकान किराए पर दिया और किराएदार की मंशा गलत हो जाए। यह देखकर कि बुजुर्ग अकेले हैं, खाते-पीते हैं, उनकी जान लेने की योजना बन जाए, ऐसे में क्या हो सकता है?-क्षमा शर्मा 
 

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