Edited By ,Updated: 25 Jun, 2026 05:25 AM

जब भविष्य के इतिहासकार नरेंद्र मोदी युग की परिवर्तनकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का आकलन करेंगे, तो संभव है कि वे इस निष्कर्ष पर पहुंचें कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पी.एम.ए.वाई.) वास्तव में केवल घर बनाने की योजना नहीं थी। यह सम्मानजनक जीवन प्रदान करने...
जब भविष्य के इतिहासकार नरेंद्र मोदी युग की परिवर्तनकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का आकलन करेंगे, तो संभव है कि वे इस निष्कर्ष पर पहुंचें कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पी.एम.ए.वाई.) वास्तव में केवल घर बनाने की योजना नहीं थी। यह सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की योजना थी। यह सशक्तिकरण की योजना थी और सबसे बढ़कर, यह उस पीढ़ीगत गरीबी के चक्र को तोडऩे का प्रयास था, जिसने दशकों तक करोड़ों भारतीय परिवारों को अपनी गिरफ्त में रखा था। 25 जून, 2015 को ‘सभी के लिए आवास’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना ने पिछले 11 वर्षों में स्वतंत्र भारत की सबसे प्रभावशाली सामाजिक पहलों में अपना स्थान बना लिया है। इसके ग्रामीण और शहरी दोनों घटकों के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक घर स्वीकृत या निर्मित किए जा चुके हैं, जिनसे लगभग 20 करोड़ भारतीयों का जीवन प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित हुआ है।
दशकों तक भारत में गरीबी उन्मूलन की नीतियां आय बढ़ाने पर केंद्रित रहीं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस समस्या को एक अलग दृष्टिकोण से देखा। इसने समझा कि किसी गरीब परिवार के लिए पक्का घर बनाना जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश होता है। लाखों परिवार वर्षों तक बचत करते रहते थे, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं से समझौता करते थे, फिर भी अपना घर नहीं बना पाते थे। प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस आॢथक समीकरण को बदल दिया।जब घर बनाने का बड़ा खर्च सरकार वहन करने लगी, तब परिवारों के सीमित संसाधन अन्य महत्वपूर्ण आवश्यकताओं के लिए उपलब्ध होने लगे। बच्चों की शिक्षा पर अधिक खर्च होने लगा। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई। छोटे व्यवसाय शुरू हुए। बचत बढ़ी। दूसरे शब्दों में कहें तो इस योजना ने करोड़ों परिवारों को केवल जीवित रहने की चिंता से निकालकर आगे बढऩे और बेहतर जीवन की आकांक्षा करने का अवसर दिया।
प्रधानमंत्री आवास योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह रही कि घरों का स्वामित्व महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में देने को प्राथमिकता दी गई। करोड़ों महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का घर उनके जीवन की पहली ऐसी संपत्ति है, जिसे वे अपना कह सकती हैं। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आॢथक सुरक्षा देता है, परिवार में उनकी निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह प्रधानमंत्री मोदी की ‘महिला विकास’ नहीं, बल्कि ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है। सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर आदिवासी इलाकों तक, दूरदराज गांवों से लेकर शहरों तक, यह योजना उन समुदायों तक पहुंची जहां कभी सरकारी योजनाओं की पहुंच सीमित मानी जाती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना ने शासन-प्रशासन का एक महत्वपूर्ण सबक भी दिया है-बड़े पैमाने की कल्याणकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब वे जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ लागू की जाएं।
11 वर्षों बाद, प्रधानमंत्री आवास योजना हमें यह याद दिलाती है कि परिवर्तनकारी शासन हमेशा बड़े राजनीतिक नारों या सुर्खियों से नहीं बनता। कभी-कभी यह उस मां के हाथ में घर की चाबी देने से बनता है, जिसने जीवन भर अपने घर का सपना देखा हो। कभी यह उस बच्चे की मुस्कान में दिखता है, जो अब पक्की छत के नीचे पढ़ सकता है। कभी यह उस परिवार की राहत में दिखाई देता है, जिसे अब हर मानसून में अपने आशियाने के टूटने की चिंता नहीं सताती। ये ऐसे बदलाव हैं, जो भले ही टी.वी. बहसों का विषय न बनें लेकिन वे राष्ट्र के सामाजिक ढांचे को गहराई से बदल देते हैं।
कई मायनों में प्रधानमंत्री आवास योजना मोदी सरकार के शासन मॉडल का प्रतिनिधित्व करती है-बड़े पैमाने पर डिलीवरी, तकनीक-सक्षम कार्यान्वयन, महिला-केंद्रित सशक्तिकरण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मानपूर्वक विकास पहुंचाने का संकल्प। विकसित भारत 2047 की यात्रा में यह योजना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। केवल आॢथक विकास किसी राष्ट्र को विकसित नहीं बनाता। विकास तभी सार्थक होता है जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर और वंचित व्यक्ति तक पहुंचे। पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री आवास योजना ने यही कार्य किया है। इसने आवास को केवल एक कल्याणकारी सुविधा से आगे बढ़ाकर सामाजिक गतिशीलता, महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक स्थिरता और गरीबी उन्मूलन का माध्यम बना दिया है।-तुहिन सिन्हा(राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी)