Edited By Niyati Bhandari,Updated: 25 Jun, 2026 03:32 PM

Nirjala Ekadashi Vrat: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और इनमें सबसे कठिन मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस साल 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। इस व्रत में श्रद्धालु अन्न और जल का त्याग करते हैं, इसलिए इसे तपस्या के समान माना जाता है।
Nirjala Ekadashi Vrat: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और इनमें सबसे कठिन मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस साल 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। इस व्रत में श्रद्धालु अन्न और जल का त्याग करते हैं, इसलिए इसे तपस्या के समान माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति साल भर की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता है, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत करने से ही उसे सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है।
अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह भय रहता है कि यदि अनजाने में उनसे कुछ जल ग्रहण हो जाए या व्रत टूट जाए, तो क्या होगा? ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, भगवान भाव के भूखे होते हैं और अनजाने में हुई गलती के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं।
What to do if the Nirjala Ekadashi fast is broken अगर अनजाने में टूट जाए निर्जला एकादशी व्रत, तो करें ये उपाय

यदि किसी कारणवश आपका व्रत खंडित हो गया है, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। आप यहां बताए गए काम कर सकते हैं:
क्षमा प्रार्थना: सबसे पहले भगवान विष्णु के समक्ष दीप जलाकर अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें।
मंत्र जप: इन मंत्रों का जाप करें।
मंत्र: हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे
मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

धार्मिक पाठ: व्रत टूटने के दोष को दूर करने के लिए विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
निर्जला एकादशी व्रत के दिन शाम को करें ये उपाय: तुलसी एवं पीपल के पेड़ की पूजा करें। उनके नीचे दीपक जलाकर 11 बार परिक्रमा करनी और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। शाम के समय ईशान कोण में घी का दीपक जलाना चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु का अभिषेक करें और गाय को हरा चारा खिलाएं। चींटियों को आटे में शक्कर मिलाकर खिलाएं।
निर्जला एकादशी दान-पुण्य: आम और खरबूजे का दान करना परम पुण्यदायी होता है। अगर आप ये दान निर्जला एकादशी के दिन करते हैं तो इसका बेहद फायदा होता है। इस दिन पंखा दान करना भी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन साधक निर्जला व्रत रखकर किसी को पानी पीने का घड़ा दान करता है तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुएं, ब्राह्मण को जूते, छाता, बिस्तर और वस्त्र, आम, तरबूज और खरबूजे दान करें।
