वैदिक और सांस्कृतिक शिक्षा का महत्व

Edited By Updated: 19 Jun, 2021 05:19 AM

importance of vedic and cultural education

ताजा जानकारी के अनुसार राजस्थान की गहलोत सरकार संस्कृत शास्त्रों और वेदों के ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए जल्द एक वैदिक शिक्षा और संस्कार बोर्ड का गठन करेगी। देश की

ताजा जानकारी के अनुसार राजस्थान की गहलोत सरकार संस्कृत शास्त्रों और वेदों के ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए जल्द एक वैदिक शिक्षा और संस्कार बोर्ड का गठन करेगी। देश की अनूठी विरासत के रूप में वैदिक शिक्षा की काफी खूबियां रही हैं। हमारा वर्तमान शिक्षा जगत इनसे ज्यादा वाबस्ता नहीं है इसलिए वैदिक शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण  ङ्क्षबदुओं से अवगत होना जरूरी है। 

वैदिक शिक्षा सांस्कृतिक दृष्टि पर बल देती थी। इसके मुताबिक शिक्षित व्यक्ति को साहित्य, कला, संगीत आदि की समझ होनी चाहिए, उसे जीवन के उच्च आदर्शों का ज्ञान भी होना चाहिए। पूर्वजों की परंपरा और संस्कृति की रक्षा शिक्षित व्यक्ति का कत्र्तव्य था। वैदिक शिक्षा से समस्त देश में कुछ ऐसे आधारभूत मूल्यों की स्थापना हुई जो आज भी सांस्कृतिक एकता के आधार हैं। कुछ लोगों के अनुसार आज की शिक्षा प्रणाली में यह एक आऊटडेटेड विचार समझा जा सकता है। 

वैदिक शिक्षा प्रणाली के अनेक गुण थे। इन गुणों का तत्व आज भी प्रासंगिक है। वैदिककालीन शिक्षा नि:शुल्क थी, गुरुकुल में शिष्यों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता था। उनके आवास, वस्त्र तथा भोजन की व्यवस्था भी नि:शुल्क होती थी। वैदिक काल की शिक्षा पर होने वाले व्यय की पूर्ति शासन, धनाढ्य लोगों तथा भिक्षाटन एवं गुरु दक्षिणा से की जाती थी। वैदिककालीन शिक्षा द्वारा मनुष्यों का शारीरिक, बौद्धिक, नैतिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक तथा आध्यात्मिक विकास किया जाता था। 

वैदिककालीन शिक्षा का पाठ्यक्रम व्यापक था। वैदिक काल में मनुष्य के प्राकृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक तीनों पक्षों के विकास पर बल दिया जाता था और इसके लिए शिक्षा के पाठ्यक्रम में भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों प्रकार के विषयों को स िमलित किया जाता था। हमारी आज की शिक्षा में आध्यात्मिक तत्व न होने के कारण हमारे दिलो-दिमाग से सामाजिक संवेदना विलुप्त होती जा रही है। 

वैदिककालीन शिक्षा में उत्तम शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जाता था। अनुकरण, व्या यान, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तर, तर्क, विचार-विमर्श, चिंतन-मनन, सिद्धिध्यासन, प्रयोग एवं अ यास, नाटक एवं कहानी इत्यादि वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक विधियों का विकास किया जा चुका था। इनको पुन: हमारे शिक्षण में शामिल करने की जरूरत है।

वैदिक काल में गुरु तथा शिष्यों का जीवन अत्यंत संयमित और अनुशासित होता था। उनकी जीवनशैली सादा जीवन उच्च विचार पर आधारित थी। वैदिककालीन शिक्षा में गुरु तथा शिष्यों के मध्य मधुर संबंध थे। दोनों के मध्य स्नेह तथा श्रद्धा का संबंध था। दोनों एक-दूसरे के प्रति त्याग की भावना रखते थे तथा शिक्षकों के बीच मानस पिता-पुत्र के संबंध थे। क्या आज ऐसे रिश्ते वांछित नहीं हैं? 

वैदिककालीन शिक्षा में गुरुकुलों का पर्यावरण अति उत्तम था। गुरुकुल प्रकृति की स्वच्छ वातावरण से युक्त स्थलों में होते थे, जहां जन कोलाहल नहीं था तथा जल तथा वायु शुद्ध प्राप्त होती थी। आज हम छात्रों को किन हालातों में शिक्षित कर रहे हैं। वस्तुत: मशीनों के जरिए दी जा रही शिक्षा मनुष्य रूपी छात्रों को असंवेदनशील रोबोट के रूप में विकसित कर रही है। यहां पर सांस्कृतिक शिक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है। 

वैदिककालीन जीवन पद्धति संस्कार प्रधान थी। वैदिक शिक्षा प्रणाली पूर्णतया दोष रहित थी ऐसा कहना कठिन है, वैदिककालीन शिक्षा में राज्य का नियंत्रण या उत्तरदायित्व नहीं था। तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था पूर्णत: व्यक्तिगत नियंत्रण में थी, जो पूर्णत: गुरुकुलों तक सीमित थी। अत: इससे जन शिक्षा की अवहेलना होती थी। वैदिककालीन शिक्षा में आय की सुनिश्चित एवं विधिवत् व्यवस्था नहीं थी। यद्यपि वैदिककालीन शिक्षा का व्यय राजा, धनी लोग, भिक्षाटन तथा गुरु दक्षिणा से पूरा किया जाता था, किंतु इन सब का कोई निश्चित समय, मात्रा के न होने से असमंजस की स्थिति रहती थी। 

वैदिक जमाने की तरह आज भी अमरीका और अनेक देशों में उच्च शिक्षा संस्थाओं की रिसर्च फंडिंग अमीर लोग करते हैं लेकिन हमारे यहां की स्थिति दयनीय है। वैदिककालीन शिक्षा में रटने पर विशेष बल दिया जाता था। यद्यपि उस समय उत्तम शिक्षा विधियों का विकास हो चुका था, किंतु लिखने की समुचित व्यवस्था का अभाव होने के कारण याद रखने पर विशेष बल दिया जाता था। वैदिककालीन शिक्षा की अनुशासन व्यवस्था अत्यंत कठोर थी। 

वैदिक शिक्षा के व्यावहारिक उद्देश्य रहे हैं, जिनकी आज बहुत जरूरत है।  इनमें चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व का विकास, कार्यक्षमता और नागरिक जि मेदारी का विकास और विरासत व संस्कृति का संरक्षण शामिल हैं। नई शिक्षा नीति 2020 में  इन बिन्दुओं  पर व्यापक ध्यान दिया गया है। हमारे छात्रों को शानदार शिक्षा परंपराओं को आत्मसात करने में और अधिक सक्षम बनाने के लिए वैदिक और सांस्कृतिक शिक्षा के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। वैदिक शिक्षा सुशासन के सिद्धांतों का स्टोर हाऊस है। इन सिद्धांतों को शिक्षा में जोड़ कर कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को साकार किया जा सकता है।-डॉ.वरिन्द्र भाटिया

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