Edited By ,Updated: 07 Apr, 2026 03:26 AM

ओपिनियन पोल के ताजा अनुमानों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लगातार चौथी बार ऐतिहासिक कार्यकाल हासिल करने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और ममता की स्थिति को चुनौती देने के लिए...
ओपिनियन पोल के ताजा अनुमानों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लगातार चौथी बार ऐतिहासिक कार्यकाल हासिल करने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और ममता की स्थिति को चुनौती देने के लिए पर्याप्त महत्वाकांक्षी है। इस बीच, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई.) दोनों ने अपना प्रभाव खो दिया है। ममता के लिए मुख्य संदेश यह है कि भाजपा का उदय इन पारंपरिक दलों की कीमत पर हुआ है।
बंगाल में राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है, जिससे यह चुनाव राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बन गया है। यह गतिशीलता एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक परिदृश्य को बढ़ावा देती है। टी.एम.सी. के पास स्पष्ट बढ़त है, जिसकी 119 सीटें ‘बेहद मजबूत’ और अतिरिक्त 95 सीटें ‘मजबूत’ श्रेणी में हैं। ममता बनर्जी नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में अपने पूर्व सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी का सामना कर रही हैं। भाजपा ने सुवेंदु को भाजपा के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया है। भाजपा ने अपना अभियान ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के दौरान टी.एम.सी. की आलोचना करने पर केंद्रित किया है। पिछले हफ्ते, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ एक चार्जशीट जारी की, जिसमें बनर्जी को ‘ममता जी’ या ‘दीदी’ कहकर संबोधित करते हुए उनके नेतृत्व की आलोचना की गई।
2021 के पश्चिम बंगाल चुनावों में टी.एम.सी. ने 215 सीटें जीतकर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की थी। यह एक उल्लेखनीय राजनीतिक बदलाव को दर्शाता है। इसके विपरीत, भाजपा ने 77 सीटें जीतीं, जो राज्य में उसके बढ़ते प्रभाव को उजागर करता है। धार्मिक और जातिगत आधार पर मतदान के पैटर्न से पता चलता है कि कैसे विभिन्न समुदाय टी.एम.सी. और भाजपा का समर्थन करते हैं, जिससे चुनाव के परिणाम के लिए हर वोट महत्वपूर्ण हो जाता है। मेदिनीपुर और मालदा जैसे क्षेत्र, जहां सीटों का फेरबदल अधिक होता है, प्रमुख युद्धक्षेत्र हैं, जो चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। बनर्जी ने मतदाताओं से आह्वान किया है कि वे उन्हें केवल व्यक्तिगत टी.एम.सी. उम्मीदवारों के रूप में नहीं, बल्कि राज्य विधानसभा की सभी 294 सीटों के उम्मीदवार के रूप में देखें। उन्होंने भाजपा पर बिहार, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को अवैध रूप से पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में जोडऩे की कोशिश करने का आरोप लगाया और दावा किया कि वे बिहार में अपनाए गए तरीकों के समान ट्रेन से इन मतदाताओं को लाने की योजना बना रहे हैं।
‘जय श्री राम’ का स्थान अब ‘जय मां दुर्गा’ के नारे ने ले लिया है। यह बदलाव बंगाल की संस्कृति में देवी के महत्व को दर्शाता है।
पश्चिम बंगाल में लगभग 125 निर्वाचन क्षेत्रों में मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी है, जिनमें से टी.एम.सी. ने 100 से अधिक सीटें जीतीं, जिससे उन्हें एक मजबूत लाभ मिला। 2021 के चुनावों के विपरीत, भाजपा अब अपने अभियान में धार्मिक विषयों पर कम ध्यान केंद्रित कर रही है। भाजपा का लक्ष्य आगामी चुनावों में 2021 की तरह धार्मिक ध्रुवीकरण से बचना है। 30 प्रतिशत से अधिक मतदाता मुस्लिम होने के कारण, पिछले विभाजनों ने उनके समर्थन को नुकसान पहुंचाया है। अपने दृष्टिकोण को नरम करने के लिए, वे अब ‘बाहरी’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यह ‘भीतरी बनाम बाहरी’ का मुद्दा ममता को लाभ पहुंचाता है। एक दृढ़निश्चयी नेता ममता ने 2011 में 34 साल तक शासन करने वाली कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फैंककर सत्ता हासिल की थी और तब से वह अपने पद पर बनी हुई हैं। टी.एम.सी. बहुत अधिक संरचित नहीं है और इसमें कड़े नियमों का अभाव है। इसमें विचारधाराओं के एक मजबूत सैट की भी कमी है। भारत के कई क्षेत्रीय दलों की तरह, यह ममता बनर्जी के मजबूत नेतृत्व पर निर्भर है, जिन्हें उनके समर्थक प्यार से ‘अग्नि देवी’ कहते हैं।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पार्टी को एक महत्वपूर्ण बढ़त देगी, खासकर इसलिए क्योंकि नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लोकप्रिय नेता होने के बावजूद, राज्य विधानसभा चुनावों में संघर्ष करते रहे हैं। बड़ी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में जीतना एक मजबूत प्रतीकात्मक महत्व रखेगा और 2029 के आम चुनावों में मोदी की संगठित पार्टी को चुनौती देने के लिए बिखरे हुए विपक्ष की बची-खुची संभावनाओं को भी कम कर देगा। मछली को लेकर विवाद, जिसे बंगाल में भाग्यशाली और नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, तब बढ़ गया जब तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की इच्छा रखने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने भाजपा एजैंटों पर बाहरी लोगों को शामिल करने के लिए फर्जी फॉर्म 6 आवेदनों के साथ पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को भरने का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनाव आयोग से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया। महत्वपूर्ण संसाधनों के बावजूद, फोर्ट विलियम को सुरक्षित करने और पश्चिम बंगाल में अपनी पहली सरकार स्थापित करने के भाजपा के प्रयास विधानसभा चुनाव में आधे रास्ते (बहुमत) तक नहीं पहुंचे हैं।
चुनाव प्रचार का रास्ता भाषणों से हटकर राजनीतिक आत्मीयता की ओर बढ़ गया है, जिसमें उम्मीदवार एक ही संदेश दे रहे हैं, ‘‘मैं आपसे ऊपर नहीं हूं, मैं आप में से ही एक हूं।’’ कल्याणकारी योजनाओं की झड़ी-छात्रों के लिए साइकिल और छात्रवृत्ति, छात्राओं को शिक्षा जारी रखने के लिए नकद हस्तांतरण और स्वास्थ्य बीमा, ने यह सुनिश्चित किया है कि बनर्जी की लोकलुभावन अपील बेदाग रहे। वह महिला मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनी हुई हैं, इस चुनाव में उनकी लगभग 17 प्रतिशत उम्मीदवार महिलाएं हैं। कमजोर होते कम्युनिस्टों द्वारा मुख्य प्रतियोगियों से वोट छीनने के लिए एक मुस्लिम मौलवी और कमजोर कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बावजूद, पश्चिम बंगाल की लड़ाई मुख्य रूप से द्विध्रुवीय है। राज्य जीतने के लिए किसी पार्टी को 45 प्रतिशत लोकप्रिय वोट हासिल करने होते हैं।
अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी जीतेंगी। अभी उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल है। भाजपा आर.एस.एस. की मदद से जमीन पर काम कर रही है और भाजपा के शीर्ष नेता कोलकाता में हैं। ममता ने सी.पी.आई.(एम) से सीखा है कि सत्ता में कैसे बने रहना है। क्या ये रणनीतियां इस बार उनके लिए काम करेंगी? यह बड़ा सवाल है।-कल्याणी शंकर