Edited By Niyati Bhandari,Updated: 27 May, 2026 02:34 PM

Ranveer Singh visits Chamundeshwari Temple Mysore: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह ने कांतारा विवाद और मां चामुंडेश्वरी पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश पर मैसूर में किया पाप का प्रायश्चित। जानें मां चामुंडेश्वरी की महिमा।
Ranveer Singh visits Chamundeshwari Temple Mysore: बॉलीवुड के 'बाजीराव' यानी रणवीर सिंह इन दिनों अपनी किसी फिल्म की वजह से नहीं, बल्कि अपनी एक पुरानी गलती के प्रायश्चित को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में अभिनेता को कर्नाटक की प्रसिद्ध चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित मां चामुंडेश्वरी के दरबार में एक आम श्रद्धालु की तरह दर्शन करते और विशेष पूजा अर्चना करते देखा गया।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह मामला फिल्म 'कांतारा' के एक दैवीय पात्र की मिमिक्री से जुड़ा है। आरोप है कि एक कार्यक्रम के दौरान रणवीर सिंह ने चामुंडेश्वरी देवी को लेकर अनुचित टिप्पणी की थी, जिससे करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं। यह मामला तूल पकड़ते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट तक जा पहुंचा।
अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए रणवीर सिंह को निर्देश दिया था कि वे चार हफ्तों के भीतर मां चामुंडेश्वरी के मंदिर जाकर अपनी गलती के लिए क्षमा मांगें। इसी आदेश का पालन करते हुए रणवीर सिंह मैसूर पहुंचे।
मां चामुंडेश्वरी की महिमा और कथा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, महिषासुर एक असुर था जो अपने अत्याचार और शक्ति के लिए प्रसिद्ध था। उसने देवताओं को परेशान कर दिया और स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। अपने शक्ति-संयम और तपस्या से उसने देवताओं को चुनौती दी। देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश से प्रार्थना की कि कोई असुरों का संहार करे। सभी देवताओं ने मिलकर महाशक्ति देवी दुर्गा का आविर्भाव किया।
देवी दुर्गा को अत्याचार और अधर्म का नाश करने के लिए उत्पन्न किया गया। उनके हाथों में त्रिशूल, खड्ग, गदा और धनुष थे। उनका वाहन शेर (सिंह) था, जो साहस और शक्ति का प्रतीक है। देवी दुर्गा ने महिषासुर का सामना करने से पहले नौ दिनों तक तप, साधना और युद्ध की तैयारी की।
यह नौ दिन का युद्ध नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हर दिन देवी ने महिषासुर के विभिन्न रूपों का संहार किया। नवरात्रि के दौरान, हर स्वरूप का दर्शन और पूजा भक्तों के लिए शक्ति और साहस का प्रतीक है। दसवें दिन, देवी दुर्गा ने महिषासुर का नाश कर दिया। यह दिन विजयादशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास:
मां चामुंडेश्वरी मंदिर मैसूर के प्राचीन मंदिरों में से एक है। जो मैसूर शहर से औसतन 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर शक्तिरपीठों की श्रेणी में आता है। मान्यता है की भगवान शिव की भार्या सती के बाल इस स्थान पर गिरे थे। मंदिर में नंदी और महिषासुर की प्रतिमाएं भी विराजित हैं। कहते हैं नंदी प्रतिमा ग्रेनाइट की बनी हुई है।
चामुंडेश्वरी मंदिर कैसे पहुंचे:
यह मंदिर मैसूर शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 3,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। चामुंडेश्वरी मंदिर जाने के दो रास्ते हैं। सीढ़ियों (जिनकी संख्या 1000 से अधिक है) और वैली रोड से होकर दर्शनों के लिए जाया जा सकता है। मंदिर में आसानी से दर्शन किए जा सकते हैं। देवी दुर्गा की मूर्ति का प्रतिदिन भव्य श्रृंगार होता है। पुजारियों द्वारा विधिपूर्वक पूजा की जाती है। वोडेयार राजवंश की कुलदेवी होने के कारण इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस मंदिर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।