Edited By Niyati Bhandari,Updated: 27 May, 2026 11:58 AM
Padmini Ekadashi to Purnima Auspicious 5 Days Significance & Remedies: अधिकमास में 3 साल बाद बना दुर्लभ संयोग! जिससे बदल जाएंगे आपके दिन।
Padmini Ekadashi to Purnima Auspicious 5 Days Significance & Remedies: हिंदू धर्म में 'पुरुषोत्तम मास' यानी अधिकमास को आध्यात्मिक उन्नति और कष्टों से मुक्ति का सबसे बड़ा शुभ समय माना जाता है। इस बार भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसाने वाला एक ऐसा महासंयोग बन रहा है, जो पूरे 3 साल बाद आया है। अधिकमास की पद्मिनी एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक के ये 5 दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत पुण्यदायी हैं। जिस जातक के जीवन में आर्थिक तंगी, गृह क्लेश या ग्रहों के दोष चल रहे हैं, उन्हें ये काम करने चाहिए, जिससे उनके बुरे दिनों पर विराम लगेगा और अच्छे दिन लौट आएंगे।

पद्मिनी (कमला) एकादशी: पदमपुराण के अनुसार पक्षियों में गरुड़, नदियों में गंगा, मासों में पुरुषोत्तम मास जितना श्रेष्ठ है, उतना ही तिथियों में एकादशी तिथि का यह व्रत पुण्यफलदायक है। इस व्रत में बिना मांगे ही भक्त को सभी सुखों की प्राप्ति होती हैं। शाम के समय तुलसी देवी के सामने घी का दीपक जलाएं और 4 परिक्रमा करें।
अधिकमास प्रदोष व्रत: भगवान विष्णु को समर्पित इस महीने में शिव जी की कृपा पाने का सुनहरा मौका 28 मई (गुरुवार) को आने वाले प्रदोष व्रत के दिन है। इस दिन त्रयोदशी तिथि का संयोग कुंडली के शनि और राहु जैसे भारी दोषों को दूर करने में सक्षम है।
राहु और शनि के प्रभाव को नष्ट करने के लिए 5 दिन तक प्रतिदिन शाम को भैरव मंदिर में तेल का दीप अर्पित करें और काले चनों का भोग लगाएं। अधिकमास पूर्णिमा तक यह उपाय करने से शुभ फल प्राप्त होंगे।

पूर्णिमा का महासंयोग: दो दिनों तक बरसेगी कृपा
अधिकमास की पूर्णिमा इस बार दो दिनों (30 और 31 मई) की होगी, जो दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
30 मई (शनिवार): इस दिन व्रत की पूर्णिमा होगी और श्री सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना विशेष लाभकारी रहेगा।
31 मई (रविवार): यह दिन स्नान और दान की पूर्णिमा का होगा, जिसमें पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के लिए तर्पण व दीपदान करने से जीवन के सभी कष्टों का नाश होता है।

पद्मिनी एकादशी से पूर्णिमा तक 5 दिन क्या करें?
भगवान श्री हरि विष्णु के भक्तों के लिए मलमास, अधिक मास या पुरुषोत्तम मास किसी बड़े पर्व से कम नहीं होता। एक महीने तक चलने वाले इस महीने के दौरान ध्यान, पूजन, कथा, स्तोत्र, आरती, चालीसा आदि पढ़ने का बहुत महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस माह जो व्यक्ति विष्णुसहस्रनाम का पाठ और श्री भागवत जी का पाठ करता है, उसके लिए ऐश्वर्य के द्वार खोल देते हैं भगवान।
श्रीमद् भागवत को साक्षात श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है। इसको सुनने और सुनाने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। कलयुग में भागवत जी का पाठ हर दुख का अंत करने वाला है। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। जो पुण्य गंगा, गया, काशी, पुष्कर या प्रयाग तीर्थ से प्राप्त होता है, उससे भी अधिक पुण्य भागवत कथा से प्राप्त होता है।
महाभारत के 'अनुशासन पर्व' में भगवान विष्णु के एक हजार नामों का वर्णन मिलता है। जब भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर थे उस समय युधिष्ठिर ने उनसे पूछा कि, "कौन ऐसा है, जो सर्व व्याप्त है और सर्व शक्तिमान है?"
तब उन्होंने भगवान विष्णु के एक हजार नाम बताए थे।
मंत्र से होने वाले लाभ: भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था कि हर युग में इन नामों को पढ़ने या सुनने से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यदि प्रतिदिन इन एक हजार नामों का जाप किया जाए तो सभी मुश्किलें हल हो सकती हैं।
विष्णु सहस्रनाम के जाप में बहुत सारे चमत्कार समाएं हैं। इस मंत्र को सुनने मात्र से संवर जाएंगे सात जन्म, सभी कामनाएं हो जाएंगी पूर्ण और हर दुख का हो जाएगा अंत।
