विपक्ष का भाजपा पर बिहार में राजनीतिक अपहरण का आरोप

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 05:15 AM

opposition accuses bjp of political kidnapping in bihar

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित उत्तराधिकारियों में बिहार के डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय शामिल हैं। हालांकि, अटकलें लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही जनता दल (यूनाइटेड) में...

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित उत्तराधिकारियों में बिहार के डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय शामिल हैं। हालांकि, अटकलें लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होकर औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं। राजनीतिक चर्चा है कि निशांत बिहार के उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी उभर सकते हैं।

इस बीच, विपक्ष ने भाजपा पर बिहार में राजनीतिक अपहरण करने का आरोप लगाया और कहा है कि जद (यू) का मुख्य वोटर अब ठगा हुआ महसूस कर रहा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाने का फैसला लोगों के जनादेश के साथ धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से दलितों और ओ.बी.सी. के खिलाफ रही है और कुमार के सी.एम. पद छोडऩे के बाद, वह सोशलिस्ट गढ़ में अपना एजैंडा लागू करने की कोशिश करेगी। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि नीतीश कुमार को आगे बढ़ाना भाजपा के दो बड़े नेताओं की रची हुई साजिश थी। इस साजिश के जरिए ‘जी2’ ने राज्य में सत्ता पर कब्जा कर लिया है। यह लोगों के जनादेश के साथ धोखा है।

महाराष्ट्र में 7 सीटों परव निर्विरोध चुनाव! : महाराष्ट्र में 7 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव बिना किसी मुकाबले के होने की संभावना है, क्योंकि मैदान में ठीक 7 उम्मीदवार हैं। भाजपा के उम्मीदवार रामदास अठावले, पार्टी महासचिव विनोद तावड़े, माया इवनाते और रामराव वडकुटे हैं। शिंदे शिवसेना की उम्मीदवार उसकी तेज-तर्रार स्पीकर डा. ज्योति वाघमारे हैं। राकांपा के उम्मीदवार पार्थ पवार (दिवंगत अजित पवार के बेटे) हैं, जबकि महा विकास अघाड़ी (एम.वी.ए.) ने झगड़े से बचने में कामयाबी हासिल की थी और शरद पवार की कैंडिडेचर को सपोर्ट किया था।

हरियाणा में भाजपा-कांग्रेस को मिल सकती है 1-1 सीट : हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होगा। किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा की जगह नए उम्मीदवार आएंगे, क्योंकि उनका कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवारों ने दोनों सीटों के लिए अपना नॉमिनेशन फाइल कर दिया है। भाजपा के उम्मीदवार संजय भाटिया हैं, जबकि कांग्रेस की तरफ से कर्मवीर बौद्ध चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन एक इंडिपैंडैंट उम्मीदवार सतीश नांदल के आने से चुनाव में ट्विस्ट आ गया है और यह दिलचस्प हो गया है। इससे 2016 और 2022 में राज्य के राज्यसभा चुनावों की तरह होने की ङ्क्षचता बढ़ गई है। विधानसभा में सदस्यों की संख्या के हिसाब से, भाजपा और कांग्रेस दोनों 1-1 सीट जीत सकती हैं, क्योंकि वे जीत के लिए जरूरी 31 फस्र्ट प्रैफरैंस वोट आसानी से जुटा सकते हैं। 48 विधायकों वाली भाजपा को 3 इंडिपैंडैंट का समर्थन है और उसे आई.एन.एल.डी. के दो विधायकों से भी वोट मिलने की उम्मीद है। अगर भाजपा अपने सरप्लस वोट ट्रांसफर भी कर देती है, तो भी नांदल के पास 9 वोट कम पड़ जाएंगे। 

ओडिशा में एक सीट पर ऊंचे दांव : ओडिशा से चौथी राज्यसभा सीट के लिए मुकाबले के साथ ही एक उच्च-दांव राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है, जिसमें भाजपा का मुकाबला बीजू जनता दल (बीजद)-कांग्रेस गठबंधन से है। व्यवसायी-राजनेता दिलीप रे के भाजपा के समर्थन से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में प्रवेश के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है और उन्होंने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए चौथे उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। रे का मुकाबला बीजद और कांग्रेस द्वारा समॢथत संयुक्त उम्मीदवार डा. दत्तेश्वर होता से होगा। 147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में, भाजपा को वर्तमान में 3 निर्दलीय सहित 82 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो इसे 2 राज्यसभा सीटों को सुरक्षित करने के लिए आरामदायक स्थिति में रखता है। इसके आधिकारिक उम्मीदवार-राज्य पार्टी अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार-चुने जाने के लिए तैयार हैं लेकिन चौथी सीट के लिए जबरदस्त पॉलिटिकल दांव-पेंच शुरू हो गए हैं। जीतने के लिए 30 विधायक चाहिएं। दो मैैंबर चुनने के बादए भाजपा के पास 22 सरप्लस वोट बचते हैं। बीजद एक सीट जीतने के बाद, 18 सरप्लस वोट रखती है और उसे 14 कांग्रेस विधायक और एक भाकपा विधायक का घोषित समर्थन है, जिससे विपक्षी गठबंधन जीत की कगार पर है। लेकिन, अगर रे बीजद या कांग्रेस के अंदर क्रॉस-वोटिंग करवाने में कामयाब हो जाते हैं, तो मुकाबला भाजपा के पक्ष में झुक सकता है। 

आखिर द्रमुक-कांग्रेस में सीट-शेयरिंग को लेकर सहमति : कई दिनों की अनिश्चितता और कड़े मोल-भाव के बाद, सत्ताधारी द्रमुक और कांग्रेस ने आखिरकार असैंबली इलैक्शन के लिए सीट-शेयरिंग एग्रीमैंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। द्रमुक अध्यक्ष और चीफ मिनिस्टर एम.के. स्टालिन और टी.एन.सी.सी. अध्यक्ष सेल्वापेरुंथगई के हस्ताक्षर किए गए एग्रीमैंट के मुताबिक, कांग्रेस 28 असैंबली सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट भी दी गई है। यह गठबंधन एक समय पावर शेयरिंग और ज्यादा सीटों की मांग को लेकर टूटने वाला था लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी द्वारा सीनियर लीडर पी. चिदम्बरम को अपना वार्ताकार बनाकर 22 साल पुराने गठबंधन को बचा लिया गया। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने खरगे को अपनी मंजूरी तो दे दी लेकिन वह इस डील से पूरी तरह खुश नहीं हैं क्योंकि द्रमुक ने कांग्रेस की 2016 की 41 असैंबली सीटों के आंकड़े को वापस लाने की रिक्वैस्ट पर ध्यान नहीं दिया।-राहिल नोरा चोपड़ा 
 

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