दावों के बावजूद सुरक्षित नहीं बनाई जा सकी रेल यात्रा

Edited By Updated: 18 Jan, 2022 05:38 AM

rail travel could not be made safe despite claims

हाल'' ही में बीकानेर एक्सप्रैस के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण 9 लोगों की मौत हो गई और अनेक गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि रेल के इंजन में कोई खराबी

हाल' ही में बीकानेर एक्सप्रैस के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण 9 लोगों की मौत हो गई और अनेक गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि रेल के इंजन में कोई खराबी आने की वजह से यह हादसा हुआ। दुर्भाग्यपूर्ण है कि किरायों में बढ़ौतरी करने तथा तमाम दावों के बावजूद रेल यात्रा को सुरक्षित नहीं बनाया जा सका। रेल मंत्रालय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए काफी धन खर्च कर रहा है लेकिन इसका उतना फायदा आम यात्रियों को नहीं मिल पा रहा। 

पिछले कुछ समय से जितनी भी रेल दुर्घटनाएं हुई हैं, उनमें से ज्यादातर का कारण चलती रेल का पटरी से उतर जाना है। सवाल यह है कि विकसित दौर में ट्रेनों के संचालन से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? यह शर्मनाक है कि सरकार बुलेट ट्रेन या विभिन्न सुविधाओं वाली महंगी ट्रेनें चलाने हेतु बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। 

सर्दियों में जहां एक ओर कोहरे के कारण परेशानी होती है, वहीं दूसरी ओर ठंड के कारण पटरियों में क्रैक की वजह से दुर्घटना होने की स भावना बढ़ जाती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस दौर में रेलगाडिय़ों की टक्कर, उनके पटरी से उतरने और आग लगने की घटनाएं आम हो गई हैं, जो रुकने का नाम नहीं ले रहीं। किसी भी ट्रेन दुर्घटना के बाद रेल मंत्रालय बड़े-बड़े दावे तो करता है, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ भुला दिया जाता है। 

चाहे पुरानी पटरियों के रख-रखाव की बात हो या फिर सिग्नलों के आधुनिकीकरण की, इन सभी मामलों में हम अभी भी अन्य देशों से बहुत पीछे हैं। रेल मंत्रालय चौकीदार-रहित रेलवे फाटकों पर चौकीदारों की नियुक्ति तक नहीं कर पा रहा, जिस कारण अनेक दुर्घटनाएं होती रहती हैं, सैंकड़ों लोग मारे जाते हैं।

दरअसल राजनीतिक श्रेय लेने के लिए ट्रेनों की सं या लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन उस हिसाब से सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रहीं, न ही रेलवे कर्मचारियों की संख्या में उस स्तर से वृद्धि हो पा रही है। हमें इस बात पर भी विचार करना होगा कि कर्मचारियों की कमी से जूझ रही रेलवे में कहीं कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव तो नहीं है? बहरहाल, हमें रेलवे कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। 

जहां तक रेलवे के आधुनिकीकरण की बात है तो इस मामले में भी अन्य देशों के मुकाबले भारतीय रेल पिछड़ी हुई है। इससे बड़ी विड बना और क्या होगी कि कई बार रेलवे मुनाफे को लेकर तो अपनी पीठ स्वयं थपथपाता रहता है, लेकिन उस मुनाफे से यात्रियों की सुरक्षा कैसे की जाए, यह नहीं सोचना चाहता। पिछले दिनों कुछ विशेषज्ञों ने सैटेलाइट के माध्यम से ट्रेनों के नियंत्रण का सुझाव दिया था लेकिन उस पर काम नहीं हो पाया। इस दौर में जब अनेक कार्य सैटेलाइट के माध्यम से हो रहे हैं तो ट्रेनों का संचालन क्यों नहीं हो सकता? दरअसल सरकार अपने अनाप-शनाप खर्चों में तो कोई कटौती नहीं करती, लेकिन ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन के समय धन के अभाव का रोना रोया जाता है। 

गौरतलब है कि हमारे देश में ट्रेन दुर्घटनाओं में जितने लोग मारे जाते हैं, उतने दुनिया के किसी भी देश में नहीं मरते। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेल मंत्रालय यात्रियों की मंगलमय यात्रा की कामना तो करता है, लेकिन हकीकत में यात्रा मंगलमय बनाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाता। देश के अनेक भागों में नई रेलगाडिय़ां चलाई गई हैं, लेकिन उनके हिसाब से रेलवे ट्रैक उन्नत नहीं किए गए। रेल मंत्रालय ने कुछ वर्ष पूर्व एक सुरक्षा परियोजना तैयार की थी, जिसमें अनेक बिन्दुओं पर विचार किया गया था। इस योजना के अन्तर्गत पुराने हो चुके इंजनों को बदला जाना भी शामिल था। 

गौरतलब है कि अनेक इंजन अपना जीवन पूर्ण कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद भी पटरियों पर दौड़ रहे हैं। इसके अलावा अभी रेलवे की अनेक परियोजनाएं भी अधूरी पड़ी हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि ऐसी दुर्घटनाओं के समय हमारे राजनेता जान-बूझकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जिससे मुख्य मुद्दा गौण हो जाता है। अच्छा होगा कि रेल मंत्रालय और सभी दलों के राजनेता मिल-बैठ कर भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई गंभीर और सार्थक योजना बनाएं।-रोहित कौशिक


 

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