बेअदबी कानून : श्री अकाल तख्त के ऐतराजों को जल्द दूर किया जाए

Edited By Updated: 08 Jul, 2026 04:23 AM

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पंजाब के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक इतिहास में 78 वर्षों के पश्चात पहली बार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज्ज द्वारा जारी किए गए हुक्मनामे की तामील करते हुए पंजाब सरकार के मंत्री तथा ‘आप’, कांग्रेस और अकाली पार्टी के...

पंजाब के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक इतिहास में 78 वर्षों के पश्चात पहली बार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज्ज द्वारा जारी किए गए हुक्मनामे की तामील करते हुए पंजाब सरकार के मंत्री तथा ‘आप’, कांग्रेस और अकाली पार्टी के विधायक 29 जून, 2026 कों सिखों के सर्वोच्च तख्त के सचिवालय में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026 के बारे में जानकारी देने के लिए पहुंचे। श्री अकाल तख्त साहिब के 400 वर्षों से अधिक लंबे इतिहास में यह दिन सिख इतिहास में भावी पीढिय़ों के लिए ऐतिहासिक बन गया है क्योंकि संवैधानिक पदों पर सुशोभित, संवैधानिक, कानूनी और प्रजातांत्रिक पद्धति द्वारा चुने गए विधायक और मंत्री साहिबान आजादी के बाद पहली बार यहां नतमस्तक हुए। जबकि इससे पहले राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, गृहमंत्री बूटा सिंह और मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला भी हाजिर हुए, परंतु अपने संवैधानिक पदों से हटने के पश्चात। 

जत्थेदार साहिब ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026 की जानकारी हासिल करने के लिए मंत्री गण और विधायकों से बड़े उचित, तर्कसंगत और मानवाधिकारों के रक्षक के रूप मे कई तरह के प्रश्न पूछे, ताकि कानून में कमियों-पेशियों को दूर किया जा सके और कोई निर्दोष कानून के चंगुल में न फंसे। परंतु ताज्जुब यह रहा  कि कोई भी सदस्य संतोषजनक, विश्वसनीय और माकूल जवाब नहीं दे सका। जिन्होंने सर्वसम्मति से इस कानून को पवित्र सदन में पास करवाया, वे भी शाईस्ताना, दलीलाना और मौहतबराना तरीके से जवाब देने में असमर्थ रहे। अधिकतर सदस्य यही कहते रहे कि उन्हें आवश्यक कागजात  समय पर नहीं मिले या फिर पढऩे का अवसर ही नहीं मिला।

कई सदस्यों ने अपने द्वारा दिए गए सुझावों का जिक्र किया, परंतु कानून के बारे में वह भी निरुत्तर रहे। हकीकत में जत्थेदार ने अपनी योग्यता और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए विधायकों से कानून संबंधी बड़े सकारात्मक और कारआमद प्रश्न पूछे जिससे सभी कायल ही नहीं हुए, बल्कि आश्चर्यचकित भी रह गए।  यह अति हैरतअंगेज और अफसोसनाक पहलू है, जबकि कानून का निर्माण करने वाले ही कानून से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। हकीकत में जनप्रतिनिधियों की समझदारी, जिम्मेदारी और जवाबदेही पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। जो ‘कस्टोडियन’ शब्द की व्याख्या ही नहीं कर पाए। जत्थेदार साहिब ने उपस्थित मंत्रीगण और विधायकों को काबिले ऐतराज धाराओं में संशोधन करने के लिए 1 महीने का समय दिया। श्री अकाल तख्त साहिब शूरवीर सिखों की सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और यह हिंदुओं का भी बहुत बड़ा सुरक्षा कवच रहा है। यह सिख सरदारों के आपसी मतभेदों को समाप्त करने तथा भविष्य में जालिमों के खिलाफ कार्रवाई करने का मुख्य केंद्र है।

18वीं और 19वीं शताब्दी में मुगलों, नादिरशाह और अहमद शाह अब्दाली द्वारा ढहाए जा रहे जुल्मो-सितम का मुकाबला करने के लिए इसी स्थान पर बंदई खालसा और तत खालसा के मतभेद समाप्त किए गए। सरबत खालसा भी इसी स्थान पर बुलाया गया। गुरुमते यहीं पारित किए गए।  कपूर सिंह को नवाब की उपाधि से भी यही सुसज्जित किया गया। दल खालसा का भी यही निर्माण हुआ। दिल्ली पर फतेह करने के लिए सुल्तान-उल-कौम जस्सा सिंह आहलूवालिया, बघेल सिंह और जस्सा सिंह रामगढिय़ा को यहीं से आदेश देकर भेजा गया। यहीं पर महाराजा रणजीत सिंह को अकाली फूला सिंह ने धार्मिक मर्यादा तोडऩे पर सजा सुनाई। 1952 में बंटवारे के पश्चात पाकिस्तान में रह गए ऐतिहासिक धार्मिक स्थानों के खुले दर्शन-दीदार की मांग को अरदास में शामिल किया गया। सिखों की अनगिनत, अकथनीय, अविश्वसनीय कुर्बानियों तथा संघर्षमयी और गौरवमयी इतिहास का विश्व में कोई सानी नहीं है।     

 सिखों के धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी रोकने के लिए 11 अप्रैल, 1959 में पंडित नेहरू और मास्टर तारा सिंह में एक समझौता हुआ, जिसके अनुसार सरकार न तो गुरुद्वारा प्रबंधन में और न ही धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करेगी। हकीकत में यह एक मैग्ना कार्टा है। पंजाब की ‘आप’ सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पर कानून बनाने से पहले न तो एस.जी.पी.सी. से, न जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब जी से, न अकाली दल से और न ही अन्य 4 तख्तों के जत्थेदारों से तथा न ही सिख संगत से सलाह-मशवरा किया।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और  सभी धर्मों को संविधान के तहत पूरी धार्मिक स्वतंत्रता है कि वह अपने मुकद्दस धर्म ग्रन्थों और धार्मिक मर्यादाओं को बनाए रखने में स्वतंत्र है। तो फिर सरकार को ऐसा कानून बनाने की क्या आवश्यकता थी, जिससे उसमें और श्री अकाल तख्त में अनावश्यक टकराव पैदा हो, जो पंजाब में नई परेशानियों का सबब बने? बेअदबी करने के पीछे  घटिया राजनीति है, जो पंजाब के सौहार्दपूर्ण माहौल को बिगाडऩा चाहती है। धर्म एक अति संवेदनशील और आस्था का विषय है। राजनीति और धर्म के टकराव का पहले ही देश खामियाजा भुगत चुका है। श्री अकाल तख्त साहिब पर जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026 पर  दिए गए काबिले एतराज धाराओं को दूर करने के सुझावों को मान सरकार बिना देरी लागू करे, ताकि पंजाब में शांति का माहौल बना रहे।-प्रो. दरबारी लाल पूर्व डिप्टी स्पीकर, पंजाब विधानसभा

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