असम सरकार की बजट घोषणाओं से चाय उद्योग को मिलेगा बढ़ावाः संगठन

Edited By Updated: 11 Jul, 2026 02:43 PM

assam government s budget announcements to boost tea industry association

चाय उद्योग से जुड़े विभिन्न संगठनों ने असम सरकार के 2026-27 के बजट में घोषित सब्सिडी, प्रोत्साहन और कर राहत उपायों का स्वागत करते हुए कहा है कि इन कदमों से चाय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। संबंधित पक्षों ने कहा कि प्रस्तावित कदमों से वैश्विक बाजार में...

गुवाहाटीः चाय उद्योग से जुड़े विभिन्न संगठनों ने असम सरकार के 2026-27 के बजट में घोषित सब्सिडी, प्रोत्साहन और कर राहत उपायों का स्वागत करते हुए कहा है कि इन कदमों से चाय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। संबंधित पक्षों ने कहा कि प्रस्तावित कदमों से वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बनाए रखने में मदद मिलेगी और श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।

राज्य के वित्त मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने शुक्रवार को पेश बजट में निर्यातोन्मुख और प्रीमियम गुणवत्ता वाली असम सीटीसी चाय पर पहली बार तीन रुपए प्रति किलो की सब्सिडी देने की घोषणा की। वहीं पारंपरिक और विशेष श्रेणी की चाय पर उत्पादन सब्सिडी 10 रुपए से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति किलो कर दी गई है, जिसमें प्रीमियम माचा चाय भी शामिल है। छोटे चाय उत्पादकों को राहत देने के लिए कृषि आयकर छूट सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए वार्षिक कर दी गई है।

हालांकि बड़े करदाताओं पर एक अप्रैल, 2026 से कर दोबारा लागू होगा और इससे मिलने वाली अतिरिक्त आय चाय बागान समुदायों के कल्याण पर खर्च की जाएगी। गुवाहाटी चाय नीलामी खरीदार संघ (जीटीएबीए) के सचिव दिनेश बिहानी ने प्रीमियम सीटीसी चाय पर निर्यात सब्सिडी को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक लागत के दौर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और मूल्य प्राप्ति सुधारने में मदद करेगी।

भारतीय चाय संघ (टीएआई) के महासचिव पीके भट्टाचार्य ने बजट को उद्योग के लिए हर स्तर पर प्रोत्साहन देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि वैट में कमी, विशेष प्रोत्साहन योजना को मजबूती, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और 'असम टी एंड गोल्फ ट्रेल' जैसे पर्यटन पहल उद्योग को नई दिशा देंगे। इसके अलावा उद्योग संगठनों ने चाय बागानों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, गर्भवती महिलाओं के लिए 15,000 रुपए की सहायता और सामाजिक ढांचे के विकास जैसे कदमों को भी सराहा है। 

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