Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Jun, 2026 11:21 AM

भारत सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और देश के पूंजी बाजार को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और विदेश में रहने वाले व्यक्तियों (PROI) के लिए निवेश नियमों को आसान बनाने...
बिजनेस डेस्कः भारत सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और देश के पूंजी बाजार को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और विदेश में रहने वाले व्यक्तियों (PROI) के लिए निवेश नियमों को आसान बनाने के साथ-साथ सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) में निवेश को अधिक आकर्षक बनाने के कदम उठाए हैं।
कब लागू होगी छूट
सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड (G-Sec) पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (Capital Gain) को आयकर से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला किया है। यह छूट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इसके अलावा, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को भी सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाली आय पर कर छूट दी जाएगी।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा के अनुसार, अब विदेश में रहने वाले व्यक्ति (PROI) भी पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के तहत भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल एनआरआई और ओसीआई निवेशकों के लिए उपलब्ध थी। साथ ही किसी एक कंपनी में व्यक्तिगत विदेशी निवेश की सीमा 5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है, जबकि सभी PROI निवेशकों के लिए कुल सीमा 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है।
तीन पाबंदियों को हटाया जाएगा
सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाले नए सरकारी बॉन्ड और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को भी शामिल करने का फैसला किया है। इसके अलावा, सामान्य मार्ग (General Route) के तहत एफपीआई निवेश पर लागू शॉर्ट-टर्म निवेश सीमा, कंसंट्रेशन लिमिट और सिक्योरिटी-वाइज लिमिट जैसी तीन प्रमुख पाबंदियों को हटाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से भारतीय बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ेगी, लंबी अवधि के विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों का भारत की ओर रुझान बढ़ेगा। इससे विदेशी मुद्रा प्रवाह को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इन कदमों के जरिए सरकार भारतीय पूंजी बाजार को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, निवेश प्रक्रिया को सरल करने और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।