Edited By Parveen Kumar,Updated: 25 Jul, 2026 06:24 PM

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बातचीत में संगठन की अन्य मांगों को सरकार द्वारा...
नेशनल डेस्क : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बातचीत में संगठन की अन्य मांगों को सरकार द्वारा मान लिये जाने के बाद कॉजपा ने अपना आंदोलन समाप्त करने का एलान किया। प्रधान ने दोपहर में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन "बेहद दुखी" है और यह उनके लिए "व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।"
प्रधान ने कहा, "जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र-विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।" इस बीच, छात्रों के आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉजपा ने घोषणा की कि वह केंद्र सरकार से नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और 20 जुलाई को संगठन के 'संसद चलो' मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने का आश्वासन मिलने के बाद अपना विरोध-प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से समाप्त कर रही है।
कॉजपा प्रवक्ता सौरव दास ने यहां कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद कहा, "हम सभी प्रदर्शनकारियों से अपने-अपने घर लौटने का आग्रह करते हैं, क्योंकि सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं।" वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को वापस लेने के लिए कदम उठाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। उनसे पहले एमजे अकबर ने 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब मीटू आंदोलन के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
प्रधान का इस्तीफा परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से विभिन्न उपाय घोषित किए जाने के एक दिन बाद आया। इन उपायों में प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला कानून लाना और तेजी से सुनवाई के लिए त्वरित अदालत बनाना शामिल है। परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉजपा के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 20 जून को छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था। कॉजपा एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन मंच है, जिसकी स्थापना आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पदाधिकारी अभिजीत दीपके ने की है। धीरे-धीरे यह हाल के समय के युवाओं के नेतृत्व वाले सबसे अहम आंदोलनों में से एक बन गया।
प्रधान के इस्तीफे के कुछ समय बाद सरकार और कॉजपा के बीच शनिवार को एक और बैठक हुई। यह कॉजपा और सरकार के बीच चौथी आधिकारिक बैठक थी। इस बैठक में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री नड्डा और जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि कॉजपा प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल थे। नड्डा ने 20 जुलाई को अपने आवास पर दास और रांका के साथ एक के बाद एक दो बैठकें की थीं। उसी दिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने संगठन के 'संसद चलो' आह्वान पर संसद की ओर मार्च शुरू किया था, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करके उन्हें पीछे धकेल दिया था। इस दौरान कई लोग घायल हुए थे। शुक्रवार को भी दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई थी। इसके बाद कॉजपा ने कहा था कि प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।
बृहस्पतिवार आधी रात के आसपास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में घोषणा की कि प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के प्रावधानों वाला एक विधेयक अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा। कुछ घंटों बाद शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए एक मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने कहा, "कॉजपा से पंगा मत लेना।" वहीं, छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में 26 दिन अनशन करने वाले जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "लोकतंत्र की जीत, प्रत्यक्ष लोकतंत्र... जो सीधे सड़कों से निकला है।"
उन्होंने इसे "शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत" बताया तथा "डर को त्यागकर देश के हर कोने में खड़े होने के लिए कॉजपा, जेन-जेड और आम नागरिकों को बधाई दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधान के इस्तीफे को देश के करोड़ों युवाओं, सत्य और साझा विपक्ष की जीत तथा प्रधानमंत्री मोदी के "हठ" की हार करार दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधान के इस्तीफे को ''शिक्षा व्यवस्था'' को फिर से संवारने की दिशा में ''बड़ा कदम" बताया और कहा कि ''इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।'' पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने प्रधान के इस्तीफे को "जनता की जीत" बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आने के बाद से ही प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही थी।