केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, बोले- छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं, पीएम मोदी को भेजी चिट्ठी

Edited By Updated: 25 Jul, 2026 02:41 PM

education minister dharmendra pradhan has resigned

NEET-UG परीक्षा को लेकर देश भर में जारी भारी बवाल और जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अपना त्यागपत्र...

Dharmendra Pradhan Resigned : NEET-UG परीक्षा को लेकर देश भर में जारी भारी बवाल और जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर इस फैसले का ऐलान करते हुए एक भावुक पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने पद छोड़ने की मुख्य वजहों का विस्तार से जिक्र किया है।

अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा- मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी देश के विकास की असली नींव होती है। 20 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा आयोजित कराना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र में NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई का ब्योरा दिया। परीक्षा में धांधली की शिकायतें मिलते ही मामला तुरंत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया। विवादित परीक्षा को रद्द कर 21 जून को पुनः सफलतापूर्वक आयोजित किया गया जिसका परिणाम 16 जुलाई को घोषित हुआ। पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए घोषणा की गई कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की जाएगी।

 

इस्तीफे की मुख्य वजह बताते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें गहराई से आहत किया है। उन्होंने कहा कि री-टेस्ट में गरीब और वंचित परिवारों के कई मेधावी छात्रों को सफलता मिली, लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए छात्रों को गुमराह करने का काम किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला उनके निजी मान-सम्मान का नहीं बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य का है। वे नहीं चाहते कि छात्रों का समय और ध्यान कानूनी दांव-पेच व राजनीतिक बयानबाजी में भटके।

वहीं पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों तथा शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे सार्वजनिक जीवन में आगे भी पूरी निष्ठा के साथ भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की सेवा में तत्पर रहेंगे।

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