Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Jul, 2026 06:11 PM

जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। इसके साथ ही करीब 17 महीने बाद...
बिजनेस डेस्कः देश में खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई। खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी और ईंधन की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन और मॉनसून के असमान रहने के कारण महंगाई में उछाल आया है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का ताजा आंकड़ा 17 महीनों में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के मीडियम-टर्म इनफ्लेशन टारगेट से ऊपर चला गया। इससे कम महंगाई का लंबा दौर खत्म हो गया।
सोमवार को मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) के जारी आंकड़ों से पता चला कि रिटेल इनफ्लेशन रेट मई के 3.93% से बढ़कर जून में 4.38% हो गई। यह मोटे तौर पर बाजार की उम्मीदों के मुताबिक थी।
इनफ्लेशन को 4% पर बनाए रखना है RBI का टारगेट
भारतीय रिजर्व बैंक को 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक की पांच साल की अवधि के लिए हेडलाइन रिटेल इनफ्लेशन रेट को 4% पर बनाए रखने का काम सौंपा गया है। साथ ही इसे 2% से 6% की टॉलरेंस रेंज के भीतर रहने की अनुमति दी गई है। जून में रिटेल फूड इनफ्लेशन रेट 5.32% रही, जबकि मई में यह 4.78% थी। ग्रामीण इलाकों में फूड इनफ्लेशन रेट 5.45% थी, जबकि शहरी इलाकों में यह 5.09% रही।