फ्लैट के बजाय जमीन खरीदना चाहते हैं लोग, ढाई साल में भूखंडों के दाम 38% तक बढ़े

Edited By Updated: 22 Jul, 2022 11:56 AM

people want to buy land instead of flats in two and a half years the price

महामारी के बाद लोगों का निवेश के लिहाज से जमीन के प्रति आकर्षण बढ़ा है। फ्लैट के मुकाबले जमीन के दाम में तेज वृद्धि से इसका पता चलता है। संपत्ति के बारे में परामर्श देने वाली एनारॉक ने एक रिपोर्ट में यह कहा कि देश के सात प्रमुख शहरों में भूखंडों का...

नई दिल्लीः महामारी के बाद लोगों का निवेश के लिहाज से जमीन के प्रति आकर्षण बढ़ा है। फ्लैट के मुकाबले जमीन के दाम में तेज वृद्धि से इसका पता चलता है। संपत्ति के बारे में परामर्श देने वाली एनारॉक ने एक रिपोर्ट में यह कहा कि देश के सात प्रमुख शहरों में भूखंडों का औसत मूल्य पिछले ढाई साल में 38 प्रतिशत तक बढ़ा है। इसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास की जमीन की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है।

ये सात शहर हैं...बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता, मुंबई महानगर क्षेत्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-दिल्ली। इन क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में करीब ढाई साल में अच्छा इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास की जमीन के मूल्य में सबसे अधिक 38 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस क्षेत्र में भूखंडों की औसत कीमत 2,220 रुपए वर्ग फुट रही जो 2019 के अंत में 1,600 वर्ग फुट थी।

ग्रेटर नोएडा (पश्चिम) यानी नोएडा एक्सटेंशन में जमीन की कीमत 36 प्रतिशत तक बढ़ी। यहां भूखंड का मूल्य इस साल जून में 4,500 रुपए प्रति वर्ग फुट रहा जबकि 2019 के अंत में 3,300 रुपए वर्ग फुट था। फरीदाबाद के नहरपार में भूखंड की कीमत 29 प्रतिशत बढ़कर 4,500 रुपए प्रति वर्ग फुट पहुंच गई है जो 2019 के अंत में 3,500 रुपए प्रति वर्ग फुट थी।

एनारॉक समूह के उपाध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा, ‘‘महामारी के बाद संपत्ति में निवेश करने वालों के लिए जमीन आकर्षक हुई है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बेहतर चुने गए भूखंड, अपार्टमेंट की तुलना में कहीं अच्छा रिटर्न दे रहे हैं।’’ परामर्श कंपनी ने कहा कि रियल्टी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां अब भूखंड उपलब्ध कराने के क्षेत्र में कदम रख रही हैं। यह अब छोटे और असंगठित रूप से काम करने वाली इकाइयों का मजबूत क्षेत्र नहीं रह गया है।

एनारॉक ने कहा, ‘‘ब्रांड लाभ के साथ भूखंड अब सम्मान की बात हो रहे हैं। ज्यादातर खरीदार क्षेत्र की बड़ी कंपनियों से जमीन लेना पसंद कर रहे हैं।’’ रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु में, 2019 के बाद से देवनहल्ली (18 प्रतिशत), अत्तिबेले में (24 प्रतिशत) और डोड्डाबल्लापुर रोड (18 प्रतिशत) के आसपास के भूखंडों के दाम बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, चेन्नई में, पूनमल्ली में भूखंड की औसत कीमत में 22 प्रतिशत जबकि तांबरम में 25 प्रतिशत और नवलूर में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

हैदराबाद में मेडचल, आदिबतला और घाटकेसर में भूखंड की औसत कीमतों में क्रमशः 21 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 26 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। कोलकाता के हावड़ा में भूखंड के दाम 20 प्रतिशत बढ़े हैं। एनारॉक के अनुसार, पुणे के हिंजवडी में भूखंड के दाम क्रमश: 24 प्रतिशत, चाकण में 18 प्रतिशत और मंजरी में 18 प्रतिशत बढ़े हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वास्तव में मझोले शहरों में चारदीवारी यानी गेट वाले भूखंडों की मांग अधिक है।
एनारॉक के अनुसार, ‘‘भूखंडों के मामले में दाम में कमी नहीं देखी गयी। इसकी कीमत हमेशा बढ़ती है।’’ 

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