सेबी ने मैक्स फाइनेंशियल, मैक्स लाइफ और एक्सिस समूह की कंपनियों के खिलाफ मामला निपटाया

Edited By Updated: 25 Aug, 2026 01:42 PM

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 3,911 करोड़ रुपए के कथित शेयरधारक नुकसान से जुड़े मामले में मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज, मैक्स लाइफ और एक्सिस समूह की कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है। बाजार नियामक ने कहा कि खुलासा संबंधी चूक और...

नई दिल्लीः भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 3,911 करोड़ रुपए के कथित शेयरधारक नुकसान से जुड़े मामले में मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज, मैक्स लाइफ और एक्सिस समूह की कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है। बाजार नियामक ने कहा कि खुलासा संबंधी चूक और धोखाधड़ी की योजना के आरोप साबित नहीं हुए। मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का अब नाम एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस है। 

सेबी ने सोमवार को पारित अंतिम आदेश में मैक्स समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन अनलजीत सिंह समेत सात व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी। यह कार्यवाही 24 अक्टूबर, 2024 को जारी कारण बताओ नोटिस (एससीएन) के बाद शुरू हुई थी। यह नोटिस 2009-10 से 2021-22 के दौरान मैक्स और एक्सिस समूह की कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जांच के बाद जारी किया गया था। सेबी ने 2010, 2015 और 2020 में किए गए तीन समझौतों की जांच की थी। मामले में आरोप था कि मैक्स फाइनेंशियल ने इन लेनदेन के बारे में पर्याप्त और समय पर खुलासा नहीं किया। साथ ही, मैक्स फाइनेंशियल, मैक्स लाइफ और एक्सिस समूह की कंपनियों ने ऐसी योजना बनाई जिससे मैक्स समूह की कंपनियों तथा उनके शेयरधारकों के नुकसान पर एक्सिस बैंक को अनुचित लाभ मिला। 

वर्ष 2010 के समझौते के तहत मैक्स लाइफ के शेयर एक्सिस बैंक को अंकित मूल्य पर जारी किए गए और बाद में उन्हें कई चरणों में लगातार ऊंची कीमतों पर खरीदा गया। वर्ष 2015 के समझौते में मैक्स फाइनेंशियल, मित्सुई सुमितोमो इंश्योरेंस कंपनी और एक्सिस बैंक के बीच मैक्स लाइफ की करीब 4.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के हस्तांतरण का समझौता हुआ। बाद में इन शेयर को ऊंची कीमतों पर चरणबद्ध तरीके से वापस खरीदा गया। वर्ष 2020 के समझौते के तहत शुरुआत में एक्सिस बैंक द्वारा मैक्स लाइफ में 29.002 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की बात शामिल थी। नियामकीय चर्चाओं के बाद समझौते में बदलाव किया गया और मार्च-अप्रैल 2021 में एक्सिस समूह की कंपनियों ने मैक्स लाइफ में हिस्सेदारी खरीदी। 

सेबी के कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया गया था कि इन लेनदेन को इस तरह तैयार किया गया था कि अनुमत 'कमीशन' से अधिक लाभ एक्सिस समूह की कंपनियों को मिले। इसमें कहा गया था कि इन समझौतों से मैक्स फाइनेंशियल के शेयरधारकों को 3,911.95 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और इतनी ही राशि का लाभ एक्सिस समूह की कंपनियों को मिला। हालांकि, ये कारण बताओ नोटिस में लगाए गए आरोप थे और अंततः ये साबित नहीं हो पाए। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू खुलासा संबंधी ढांचा 2010 के बाद काफी विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि एमएफएसएल के खुलासे अधिक व्यापक हो सकते थे और अधिक सतर्क रुख अपनाना बेहतर होता। 

सिंह ने कहा कि आचरण का आकलन उस समय लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''एससीएन में जिन विशिष्ट प्रावधानों का उल्लेख किया गया है, उनके उल्लंघन को साबित करने वाली सामग्री के अभाव में खुलासा संबंधी आरोप कायम नहीं रह सकते।'' नियामक ने धोखाधड़ी की योजना के आरोप को भी खारिज कर दिया। सेबी ने कहा कि मैक्स फाइनेंशियल द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने का आरोप साबित नहीं हुआ। उसे कीमत या कारोबार की मात्रा में हेरफेर, कृत्रिम बाजार तैयार करने या बाजार की निष्पक्षता में किसी अन्य तरह के हस्तक्षेप का भी कोई सबूत नहीं मिला। सेबी ने कहा कि मैक्स फाइनेंशियल, मैक्स लाइफ, एक्सिस बैंक, एक्सिस कैपिटल और एक्सिस सिक्योरिटीज ने मैक्स फाइनेंशियल के शेयरधारकों को धोखा देने के लिए धोखाधड़ी की योजना बनाई थी, यह आरोप भी साबित नहीं हुआ। आदेश में अलग-अलग अवधि में मैक्स फाइनेंशियल का नेतृत्व करने वाले लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी विचार किया गया। 

सेबी ने 114 पृष्ठ के आदेश में कहा, ''एमएफएसएल के खिलाफ मूल खुलासा संबंधी उल्लंघन या धोखाधड़ी साबित नहीं होने और उनके व्यक्तिगत कार्यों एवं दायित्वों से संबंधित कारणों के मद्देनजर एमएफएसएल के प्रमुख प्रबंधकीय कर्मचारियों के खिलाफ आरोप भी कायम नहीं रह सकते।'' आदेश में अलग से कहा गया कि कारण बताओ नोटिस 25 इकाइयों को जारी किया गया था। इनमें से एमएफएसएल के 13 गैर-कार्यकारी/स्वतंत्र निदेशकों ने निपटान आवेदन दाखिल किए हैं जो फिलहाल प्रक्रियाधीन हैं। सेबी के (निपटान कार्यवाही) विनियम, 2018 के तहत किसी निर्दिष्ट कार्यवाही में निपटान आवेदन दाखिल करने से कार्यवाही जारी रखने पर रोक नहीं लगती। हालांकि, आवेदन का निपटारा होने तक अंतिम आदेश पारित करने की प्रक्रिया रोकनी होती है। इसके अनुसार, सेबी ने इन 13 नोटिस प्राप्तकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही को स्थगित रखा और शेष के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किया।  

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