Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Sep, 2026 01:24 PM

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी देखने को मिली है। सितंबर में घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF के दाम 5.46 प्रतिशत बढ़कर 121.28 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। इससे पहले अगस्त में भी जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 7.5 प्रतिशत की...
नई दिल्ली: एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी देखने को मिली है। सितंबर में घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF के दाम 5.46 प्रतिशत बढ़कर 121.28 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। इससे पहले अगस्त में भी जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी।
ATF की कीमतों में इस लगातार बढ़ोतरी का असर मंगलवार को एयरलाइन कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। कारोबार के शुरुआती दौर में IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation के शेयरों में करीब 2.80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि SpiceJet के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
एयरलाइंस के खर्च में फ्यूल की बड़ी हिस्सेदारी
एयरलाइन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में ATF की कीमतों में बदलाव का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और लागत पर पड़ता है। ATF की कीमतें अलग-अलग शहरों में स्थानीय टैक्स और VAT जैसे शुल्कों के कारण अलग हो सकती हैं। अगस्त में मुंबई में ATF की कीमत 86,077.14 रुपए प्रति किलोलीटर, चेन्नई में 95,512.26 रुपए और कोलकाता में 95,164.90 रुपए प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी।
देश में सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) हर महीने की पहली तारीख को ATF और LPG जैसी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क फ्यूल की कीमत और विदेशी मुद्रा दरों जैसे कारकों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
IndiGo और SpiceJet के शेयरों में गिरावट
ATF की कीमतों में बढ़ोतरी की खबर के बाद मंगलवार को एयरलाइन शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। InterGlobe Aviation के शेयर NSE पर 5,087.50 रुपए के आसपास कारोबार कर रहे थे। यह पिछले बंद भाव से करीब 146.50 रुपए यानी 2.80 प्रतिशत नीचे था। वहीं, SpiceJet के शेयर करीब 10.23 रुपए पर कारोबार करते नजर आए, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 0.87 प्रतिशत नीचे थे।
बाजार जानकारों के मुताबिक, अगर ATF की कीमतों में तेजी बनी रहती है और एयरलाइंस इसका बोझ किराए में बढ़ोतरी के जरिए ग्राहकों पर पूरी तरह नहीं डाल पाती हैं, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।