Edited By Pardeep,Updated: 22 Sep, 2026 03:36 AM

400 से अधिक कार्यक्रमों, 30 शहरों, एक डीप-टैक प्रदर्शनी और नए कर-सहयोग मंचों के साथ, भारत की 2026 की अध्यक्षता ने ब्रिक्स अध्यक्षता के अर्थ को व्यापक बनाने का प्रयास किया। नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के साथ भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता...
400 से अधिक कार्यक्रमों, 30 शहरों, एक डीप-टैक प्रदर्शनी और नए कर-सहयोग मंचों के साथ, भारत की 2026 की अध्यक्षता ने ब्रिक्स अध्यक्षता के अर्थ को व्यापक बनाने का प्रयास किया। नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के साथ भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता संपन्न हुई। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भारत यह अध्यक्षता कर चुका है। यह वर्ष ब्रिक्स की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी आया, जब इसके सदस्यों की संख्या और भौगोलिक विस्तार पहले से कहीं अधिक हो चुका है। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अध्यक्षता को ‘जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण’ से प्रेरित बताया, जो सहनशीलता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित है, यही इस वर्ष का आधिकारिक विषय भी रहा। नई दिल्ली घोषणापत्र में संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और सहमति की पुन: पुष्टि की गई, अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और उत्तरदायी बहुपक्षीय व्यवस्था की मांग की गई।
एक व्यापक मंच : इस वर्ष की भागीदारी असाधारण रही। घोषणापत्र में भारत के 30 शहरों में आयोजित 400 से अधिक बैठकों और कार्यक्रमों का स्वागत किया गया, जिनमें मंत्री, सांसद, अधिकारी, विशेषज्ञ और व्यावसायिक प्रतिनिधि शामिल हुए। ब्रिक्स ने विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और देश भर की कंपनियों तक अपनी पहुंच बनाई।
जहां कूटनीति डीप-टैक से मिलती है : इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण था ब्रिक्स बिजनैस फोरम के साथ 11-12 सितम्बर को भारत मंडपम में आयोजित ‘ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’। शिक्षा मंत्रालय द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में भारत के 37 डीप-टैक स्टार्टअप और उद्यमों को ब्रिक्स देशों के व्यापारी, निवेशकों और संस्थानों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके पीछे विचार सीधा है-कूटनीतिक मंच का उपयोग व्यावसायिक द्वार खोलने के लिए किया जाए, चाहे वह तकनीकी सांझेदारी हो, निवेश या बाजार तक पहुंच। यह बातचीत वास्तव में समझौतों में बदलती है या नहीं, यही इसकी वास्तविक परीक्षा होगी।
प्रौद्योगिकी, वित्त और बारीकियां : प्रौद्योगिकी इस पूरे एजैंडे में केंद्रीय विषय रही। घोषणापत्र में विज्ञान और नवाचार में सहयोग का समर्थन किया गया, ब्रिक्स इनक्यूबेटर नैटवर्क, ब्रिक्स विज्ञान और अनुसंधान भंडार तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी पर कार्य का स्वागत किया गया और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड पर आगे विचार करने की बात कही गई। इसमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डिजिटल कौशल और मजबूत संपर्क-व्यवस्था पर बल दिया गया, जिसमें समुद्र के नीचे बिछाई गई केबल्स भी शामिल हैं। साथ ही सुलभ, सुरक्षित और विश्वसनीय ए.आई. का समर्थन करते हुए इसके जोखिमों को भी स्वीकार किया गया।
कम चर्चित परंतु महत्वपूर्ण विषय रहा कर-सहयोग। ब्रिक्स कर प्राधिकरणों ने अंतर्राष्ट्रीय कराधान, स्थानांतरण मूल्य-निर्धारण और राजस्व के आंकड़ों पर कार्य किया, जिसमें ब्रिक्स कर सहायता नैटवर्क और कर क्रॉस-लॄनग लैब ज्ञान-सांझाकरण मंचों के रूप में कार्य कर रहे हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए, जो प्राय: समान क्रॉस-बॉर्डर कर संबंधी प्रश्नों का सामना करती हैं, अनुभवों का आदान-प्रदान सहयोग है।
जनता, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा : सरकारों से आगे बढ़कर, इस अध्यक्षता ने संसदीय, व्यावसायिक, शैक्षणिक, युवा, महिला-व्यवसाय, थिंक-टैंक और नागरिक समाज के मंचों को भी एकत्र किया। शिक्षा, रोजगार और प्रौद्योगिकी में हो रहे परिवर्तन के केंद्र में युवा वर्ग है और उनके बीच बने नैटवर्क किसी भी एक अध्यक्षता से कहीं आगे तक टिके रह सकते हैं। कोच्चि में आयोजित ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक में महिलाओं के लिए वित्तीय और डिजिटल समावेशन, कौशल, उद्यमिता और नेतृत्व जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में, घोषणापत्र ने ‘स्वस्थ जीवनशैली हेतु ब्रिक्स मिशन’ और 2026-2029 के लिए एक संयुक्त कार्ययोजना का समर्थन किया। मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में इसने एक प्रशिक्षण केंद्र नैटवर्क और उत्कृष्टता केंद्रों के नैटवर्क का समर्थन किया, जिसमें निमहांस समन्वयक केंद्र की भूमिका निभाएगा। इसने पारंपरिक, पूरक और समेकित चिकित्सा पर एक ब्रिक्स विशेषज्ञ कार्य-समूह का भी समर्थन किया, जिसमें प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण और उचित विनियमन पर बल दिया गया। खाद्य सुरक्षा के मामले में सदस्य देशों ने संभावित ‘ब्रिक्स अन्न विनिमय’ पर आगे चर्चा का स्वागत किया।
वैश्विक दक्षिण और एकरूपता की सीमाएं : भारत ने सांझेदार देशों को जोडऩे के लिए ‘आऊटरीच-ब्रिक्स प्लस संवाद’ का आयोजन किया, जो माननीय प्रधानमंत्री के वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लक्ष्य के अनुरूप है। घोषणापत्र में अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक शासन-व्यवस्था की मांग दोहराई गई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुधार और निर्णय-प्रक्रिया में विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की बात शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत का इतने बड़े और विविध ब्रिक्स समूह को नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमत करना एक उल्लेखनीय कूटनीतिक उपलब्धि है। एक विस्तृत ब्रिक्स का महत्व एकरूपता में नहीं, बल्कि व्यावहारिक सहयोग की संभावनाओं को खोजने में है।
भविष्य की दिशा : नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के द्वारा आरंभ किए गए कई प्रयासों को प्रौद्योगिकी और अनुसंधान, डिजिटल संपर्क-व्यवस्था, आर्थिक सहभागिता, स्वास्थ्य, कृषि और युवा सहयोग जैसे क्षेत्रों में निरंतर तकनीकी कार्य और समन्वय की आवश्यकता होगी।
अध्यक्षताओं को उनकी घोषणाओं से कम और इस बात से अधिक याद किया जाता है कि सत्ता-हस्तांतरण के बाद उनमें से क्या शेष रहता है। भारत के इस वर्ष का मूल्यांकन इसी बात से होगा कि अगला शिखर सम्मेलन आयोजित होने तक इनमें से कितने प्रयास सक्रिय रहते हैं।-सुकांत मजूमदार (केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री)