Edited By Sanjeev,Updated: 22 Sep, 2026 08:54 AM

IIT-बॉम्बे के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की कथित आत्महत्या के बाद NCP (SP) नेता अनीश गवांडे ने देश भर में छात्रों की आत्महत्याओं के गंभीर आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आत्महत्या से होने वाली मौतों के मामले अब किसानों की आत्महत्याओं से ज्यादा हो...
नई दिल्ली (भारत) : IIT-बॉम्बे के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की कथित आत्महत्या के बाद NCP (SP) नेता अनीश गवांडे ने देश भर में छात्रों की आत्महत्याओं के गंभीर आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आत्महत्या से होने वाली मौतों के मामले अब किसानों की आत्महत्याओं से ज्यादा हो गए हैं। सोमवार को ANI से बात करते हुए गवांडे ने सुरक्षा उपाय के तौर पर IIT बॉम्बे द्वारा हॉस्टल के सीलिंग फैन को वॉल फैन से बदलने के फैसले की आलोचना की और छात्रों की भलाई के प्रति बड़े संस्थानों के नजरिए पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, 'यह अजीब बात है कि हमने इस देश में छात्रों की आत्महत्याओं को मजाक बना दिया है। IIT बॉम्बे में एक युवा छात्र की मौत के बाद संस्थान की प्रतिक्रिया क्या थी? सीलिंग फैन को वॉल फैन से बदलना। क्या इससे समस्या हल हो जाएगी?' उन्होंने बताया कि पिछले 20 सालों में 171 IIT छात्रों ने आत्महत्या की है, जबकि अकेले 2024 में 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की। उन्होंने कहा, 'पिछले 20 सालों में 171 IIT छात्रों ने आत्महत्या की है। अकेले 2024 में 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की है। इसका मतलब है कि आज इस देश में किसानों की आत्महत्याओं से ज्यादा छात्रों की आत्महत्याएं हो रही हैं। और फिर भी, प्रतिक्रिया हमेशा जल्दबाजी में और बिना सोचे-समझे दी जाती है। आपने इस मुद्दे का राजनीतिकरण देखा है; आपने देखा है कि इस मुद्दे पर आरक्षण की किस तरह आलोचना की जाती है, और यह कहा जाता है कि इस मुद्दे के जवाब में IIT बॉम्बे में मेरिट (योग्यता) की संस्कृति को खत्म किया जा रहा है।'
गवांडे ने जोर देकर कहा कि एक बड़ी समस्या है जिसके कारण छात्र ऐसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि IIT परिसरों में जातिगत भेदभाव की समस्या रही है। उन्होंने कहा, 'कोई भी युवा सिर्फ इसलिए अपनी जान नहीं देता क्योंकि वह नकल करते हुए पकड़ा गया था। साफ है कि यहां कोई बड़ी समस्या है। हम जानते हैं कि IIT परिसरों में जातिगत भेदभाव एक समस्या है; हम जानते हैं कि युवा छात्रों पर पड़ने वाला दबाव IIT परिसरों में एक समस्या है। आत्महत्या करने वाले कई अन्य छात्र अलग-अलग तरह की पृष्ठभूमि से आते हैं।'
उन्होंने कहा, 'इस मुद्दे का समाधान खोजने के बजाय इसे लेकर जो राजनीति हो रही है, वह निंदनीय है। ऐसी घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई नतीजा जारी नहीं किया जाना चाहिए।' इसके अलावा उन्होंने इस मामले में नकल या जिम्मेदार प्रोफेसरों के दावों की पुष्टि किए बिना घटना की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए संस्थान की आलोचना की।
उन्होंने कहा, 'IIT बॉम्बे ने आधिकारिक जांच से पहले ही इस आत्महत्या की जानकारी सार्वजनिक करके गलती की। जब तक हम यह पुष्टि नहीं कर लेते कि नकल हुई थी, कैसे हुई, क्यों हुई और कौन से प्रोफेसर जिम्मेदार थे, तब तक किसी भी व्यक्ति के लिए इस मामले की बारीकियों पर टिप्पणी करना पूरी तरह से अनुचित है।'