Nestle India पर FSSAI का शिकंजा: बच्चों के 3 प्रोडक्ट्स में नियमों की अनदेखी, कानूनी मामले दर्ज

Edited By Updated: 18 Sep, 2026 02:10 PM

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भारत के फूड रेगुलेटर FSSAI ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। बच्चों के पोषण (इन्फेंट न्यूट्रिशन) से जुड़े तीन प्रमुख प्रोडक्ट्स-NAN Excella Pro Stage 1, Lactogen Pro 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर...

नई दिल्ली: भारत के फूड रेगुलेटर FSSAI ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। बच्चों के पोषण (इन्फेंट न्यूट्रिशन) से जुड़े तीन प्रमुख प्रोडक्ट्स-NAN Excella Pro Stage 1, Lactogen Pro 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कंपनी के खिलाफ तीन अलग-अलग कानूनी मामले दर्ज किए गए हैं।

FSSAI की जांच में सामने आया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर नेस्ले अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए नियमों के खिलाफ जाकर प्रचार कर रही थी।  NAN Excella Pro Stage 1 प्रचार में  5 HMOs  और  Whey Protein जैसे दावे किए गए थे। Lactogen Pro 1 की प्रमोशन में  Whey Protein को  आसानी से पचने वाला बताया गया था।

FSSAI ने इन दावों के बारे में नेस्ले इंडिया से सफाई मांगी। इसके बाद अथॉरिटी ने कहा कि प्रोडक्ट 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड्स फॉर इन्फेंट न्यूट्रिशन) रेगुलेशंस, 2020' के रेगुलेशन 4(2) का उल्लंघन कर रहा था। यह रेगुलेशन बच्चों के खाने से जुड़े प्रमोशन दावों और जानकारी पर रोक लगाता है, जब ऐसी जानकारी का मकसद उनकी बिक्री बढ़ाना हो।

 लैब जांच में विटामिन की कमी
तीसरा मामला गुणवत्ता से जुड़ा है। नोटिस के अनुसार, नेस्ले इंडिया के बनाए गए फॉलो-अप फ़ॉर्मूला के एक सैंपल की लैब में जांच करने पर उसमें बायोटिन की मात्रा तय मानकों से कम पाई गई। इसके बाद सैंपल को दोबारा जांच के लिए भेजा गया। रेफरल लैब ने भी पाया कि सैंपल 2020 के नियमों के तहत तय बायोटिन की ज़रूरत को पूरा नहीं करता था। बायोटिन, जिसे विटामिन B7 भी कहा जाता है, पानी में घुलनशील B विटामिन है जो शरीर में कई कामों में शामिल होता है। बच्चों के पोषण वाले उत्पादों के लिए पोषक तत्वों की मात्रा को नियंत्रित किया जाता है क्योंकि उनका कंपोज़िशन तय मानकों के अनुसार होना चाहिए।

प्रोडक्ट्स पर बैन नहीं
वहीं दूसरी तरफ FSSAI ने साफ भी किया कि यह कार्रवाई प्रशासनिक जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इन प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है या इनका हर बैच असुरक्षित है। अंतिम फैसला कानूनी जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। 

माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, बच्चों के पोषण या इन्फेंट फॉर्मूला में कोई भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) की सलाह जरूर लें।

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