महामंडलेश्वर करौली शंकर ने संतों संग अमर शहीदों को किया नमन, ईंधन बचत का दिया राष्ट्रीय संदेश

Edited By Updated: 16 May, 2026 01:58 PM

mahamandaleshwar karauli shankar with saints gave the message fuel conservation

भारत की महान संस्कृति में संत समाज ने सदैव राष्ट्रहित, जनकल्याण और सामाजिक जागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आज जब पूरा विश्व ऊर्जा संकट, प्रदूषण और बढ़ती ईंधन खपत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारत में भी ईंधन बचत को लेकर व्यापक...

नेशनल डेस्कः भारत की महान संस्कृति में संत समाज ने सदैव राष्ट्रहित, जनकल्याण और सामाजिक जागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आज जब पूरा विश्व ऊर्जा संकट, प्रदूषण और बढ़ती ईंधन खपत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारत में भी ईंधन बचत को लेकर व्यापक जनजागरण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों को गति देने के उद्देश्य से संत समाज ने इस विशेष पहल में भाग लिया। इसी राष्ट्रीय उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए पूज्यनीय श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री करौली शंकर दास महाराज, जगतगुरु स्वामी चक्रपाणी नंदगिरी  महाराज एवं आचार्य श्री प्रमोद कृष्णन ने एक प्रेरणादायक पहल करते हुए अमर जवान ज्योति सार्वजनिक वाहन ऑटो से पहुंचकर देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
 
यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्र निर्माण और ऊर्जा संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी था। विशेष बात यह रही कि सभी संतगण सार्वजनिक वाहनो द्वारा अमर जवान ज्योति पहुंचे, जिससे आम जनता को यह संदेश दिया जा सके कि छोटी-छोटी आदतों में परिवर्तन लाकर भी देशहित में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।
 
अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर सभी प्रतिष्ठित संतों ने संयुक्त रूप से देश के वीर शहीदों को नमन किया। राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए संतों ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित में अपने संसाधनों का सदुपयोग करे और अनावश्यक अपव्यय से बचे।
 
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के उपरांत सभी संत बस द्वारा संत संसद के लिए रवाना हुए। यह यात्रा भी एक प्रतीकात्मक संदेश थी कि यदि समाज के प्रतिष्ठित लोग स्वयं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, तो आम नागरिक भी उससे प्रेरणा लेकर ईंधन बचत की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। संतों ने इस अवसर पर देशवासियों से सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे ईंधन संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानें, बल्कि इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
 
संत समाज द्वारा दिए गए संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ईंधन की अनावश्यक खपत रोकना आज राष्ट्रसेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। लोगों से अपील की गई कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें तथा यदि यात्रा आवश्यक हो तो कई कार्यों को एक साथ जोड़कर करें, जिससे ईंधन की बचत हो सके। साथ ही सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पैदल चलने को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
 
कार्यक्रम में इको-ड्राइविंग की अवधारणा को भी विशेष महत्व दिया गया। संतों ने कहा कि वाहन चलाते समय संयमित गति, नियमित सर्विसिंग और सही ड्राइविंग तकनीकों को अपनाकर ईंधन की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक से अधिक उपयोग तथा कार-पूलिंग जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की भी अपील की गई, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक बचत भी सुनिश्चित हो सके।
 
संतों ने कहा कि आज का समय केवल विकास का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी है। यदि प्रत्येक नागरिक ईंधन बचत को अपनी आदत बना ले, तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। 

 अंत में सभी संतो ने शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए प्रतिज्ञा ली और देशवासियों से अपील की कि आज ही से ईंधन बचत को अपनी आदत बनाइए और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वावलंबी राष्ट्र का निर्माण करें।
 


 

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