Ashadha Amavasya 2026: पितृ दोष से हैं परेशान? आज शाम पीपल के नीचे करें ये काम, पूर्वजों के आशीर्वाद से रोशन होगा आपका संसार

Edited By Updated: 14 Jul, 2026 12:18 PM

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Ashadha Amavasya 2026: साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को है। जानें, कैसे शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितृ दोष शांत होता है और सुख-समृद्धि आती है।

Ashadha Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि का सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। यह दिन मुख्य रूप से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, तर्पण करने और दान-पुण्य के लिए समर्पित माना जाता है। साल 2026 में 14 जुलाई, मंगलवार को आषाढ़ अमावस्या मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है या परिवार में अशांति बनी रहती है, तो इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय न केवल दोषों से मुक्ति दिलाते हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

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आषाढ़ मास की अमावस्या की शाम को पीपल के नीचे दीपक जलाने का रहस्य
पीपल के पेड़ का सिंचन, पूजन और परिक्रमा करने से जहां जीव की सभी कामनाओं की पूर्ति होती है वहीं शत्रुओं का नाश भी होता है। यह सुख-सम्पत्ति, धन-धान्य, ऐश्वर्य, संतान सुख तथा सौभाग्य प्रदान करने वाला है। इसकी पूजा करने से ग्रह पीड़ा, पितृ दोष, काल सर्प योग, विष योग तथा अन्य ग्रहों से उत्पन्न दोषों का निवारण हो जाता है। 

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आज भौम प्रदोष अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करने से कष्ट निवृत्ति होती है।

शाम को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर जप, तप एवं हरि नाम का सिमरण करने से जीव को शारीरिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त होता है। 

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पीपल के पेड़ के नीचे वैसे तो प्रतिदिन (रविवार को छोड़कर) सरसों के तेल का दीपक जलाना उत्तम कर्म है परंतु यदि किसी कारणवश ऐसा संभव न हो तो अमावस्या की शाम अथवा रात को पीपल की जड़ के साथ दीपक जरूर जलाएं क्योंकि इससे घर में सुख-मृद्धि और खुशहाली आती है, कारोबार में सफलता मिलती है, रुके हुए काम बनने लगते हैं।

तांबे के लोटे में जल भरकर भगवान विष्णु के अष्टभुज रूप का स्मरण करते हुए पीपल की जड़ में जल चढ़ाना चाहिए। फिर 5 परिक्रमाएं करनी चाहिए। 

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जो लोग अमावस्या तिथि पर पीपल के वृक्ष का रोपण करते हैं, उनके पितृ नरक से छूटकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।  

आषाढ़ अमावस्या का यह पावन पर्व पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। यदि नियम और श्रद्धा के साथ ये उपाय किए जाएं, तो जीवन की कई बाधाएं दूर हो सकती हैं।

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