भोजशाला विवाद: SC ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर ASI और MP सरकार से मांगा जवाब, ... कहा- बिना इजाज़त ...बदलाव न करे

Edited By Updated: 14 Jul, 2026 02:27 PM

bhojshala dispute sc seeks response from asi and mp government on muslim side s

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि भोजशाला विवाद अत्यंत संवेदनशील मामला है और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों पक्षों को धर्य रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को मुस्लिम पक्ष की अपीलों के एक बैच पर नोटिस जारी किया है। इन अपीलों में...

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि भोजशाला विवाद अत्यंत संवेदनशील मामला है और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों पक्षों को धर्य रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को मुस्लिम पक्ष की अपीलों के एक बैच पर नोटिस जारी किया है। इन अपीलों में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने धार जिले में 11वीं सदी के विवादित भोजशाला-कमल मौला कॉम्प्लेक्स को देवी सरस्वती का मंदिर बताया था।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह मामले की जांच करेगा, और इस बीच, एक अंतरिम उपाय के तौर पर, कॉम्प्लेक्स के पास मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज़ पढ़ने के लिए एक अलग खुली जगह दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सुप्रीम कोर्ट की इजाज़त के बिना कोई भी ढांचागत बदलाव न करे।

 शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले की रोजाना सुनवाई करने और इसका समाधान निकालने के लिए तैयार है। उच्चतम न्यायालय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया था कि धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती का मंदिर है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उसे हर शब्द का अत्यंत सावधानी के साथ प्रयोग करना होगा। प्रधान न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा, ''ये बेहद संवेदनशील मामले हैं। अदालत में कही गई कोई भी बात अनावश्यक विवाद पैदा कर सकती है या गलत संदेश दे सकती है। इसलिए हमें अपने हर शब्द के प्रयोग में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी।'

उन्होंने कहा, '' अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा यह मामला पहली बार हमारे समक्ष आया है। उच्च न्यायालय के आदेश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य सरकार की कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। हमारा मानना है कि इस मामले को 10 से 15 दिनों के भीतर उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।'' इससे पहले मुस्लिम पक्षकारों की ओर से सोमवार को पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी और अधिवक्ता निज़ाम पाशा ने पीठ से इस मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया था। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से कहा था कि वे याचिकाओं में मौजूद त्रुटियों को दूर करें। 

उन्होंने आश्वासन दिया था कि इसके बाद मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई के अपने फैसले में कहा था कि धार जिले का विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस कई दशक पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस परिसर में शुक्रवार की नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई थी। 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!