Edited By Niyati Bhandari,Updated: 14 Jul, 2026 12:19 PM

Ashadha Gupt Navratri Ghatasthapana Rules: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की शुरुआत कल से हो रही है। जानें घटस्थापना की सही विधि, 10 महाविद्याओं का महत्व और पूजा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां।
Ashadha Gupt Navratri Ghatasthapana Rules: सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के सार्वजनिक स्वरूपों की पूजा होती है, वहीं आषाढ़ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति के लिए जानी जाती है। साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ कल से होने जा रहा है। इस दौरान मां भगवती के 10 स्वरूपों यानी 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना की जाती है।
मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में की गई पूजा को जितना गोपनीय रखा जाता है, उसका फल उतना ही अधिक मिलता है। इस पावन पर्व की शुरुआत घटस्थापना (कलश स्थापना) से होती है। यदि आप भी इस बार 10 महाविद्याओं की कृपा पाना चाहते हैं, तो घटस्थापना के समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि पूजा में कोई त्रुटि न रह जाए।
10 महाविद्याओं की होती है विशेष साधना
गुप्त नवरात्रि साधारण भक्तों के साथ-साथ साधकों और तांत्रिकों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। इन नौ दिनों में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की गुप्त आराधना की जाती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है। घट की स्थापना करते समय वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो बहुत शुभ होता है। ऐसा करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं। जानिए इन वास्तु नियमों के बारे में-

ईशान कोण अर्थात उत्तर पूर्व को देवताओं की दिशा माना जाता है। इस दिशा में माता रानी की प्रतिमा और घट की स्थापना करना शुभ होता है। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
जो माता रानी के सामने अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं उन्हें इसे आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रखना चाहिए। पूजन के समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
चंदन की लकड़ी पर घट स्थापना करना शुभ होता है। पूजा स्थल के पास सफाई होनी चाहिए। वहां कोई गंदा कपड़ा या वस्तु न रखें।

जो लोग नवरात्रों में ध्वजा को बदलते हैं। वे ध्वजा को छत पर उत्तर पश्चिम दिशा में लगाएं।
पूजा स्थल के सामने थोड़ा स्थान खुला होना चाहिए। जहां बैठकर पूजा और ध्यान लगाया जा सके।
घट स्थापना स्थल के आस-पास शौचालय या स्नानगृह नहीं होना चाहिए।
