Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Oct, 2026 02:01 PM

Vijayadashami 2026: उत्तर भारत के प्रसिद्ध कुल्लू दशहरा से लेकर दक्षिण भारत के मैसूर महल, पूर्व की दुर्गा पूजा और पश्चिम के गरबा तक, जानें भारत की चारों दिशाओं में दशहरा मनाने की विविधता और परंपराएं।
Dussehra 2026: भारत में दशहरा (विजयादशमी) का पर्व देश की चारों दिशाओं में अलग-अलग मान्यताओं, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम। हर क्षेत्र में इस त्यौहार को मनाने के अपने विशेष और अनोखे रंग देखने को मिलते हैं।
उत्तर भारत: हिमाचल की कुल्लू घाटी का ऐतिहासिक 'कुल्लू दशहरा'
उत्तर भारत में रावण के पुतले जलाने की परंपरा तो प्रचलित है ही, साथ ही हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध 'कुल्लू दशहरा' विशेष पहचान रखता है।
शुरुआत और अवधि: यह उत्सव दसवें दिन (दशमी) से शुरू होता है और अगले सात दिनों तक चलता है।
ऐतिहासिक महत्व: इस त्यौहार के दौरान स्थानीय लोग उस ऐतिहासिक दिन को याद करते हैं, जब राजा जगत सिंह द्वारा अपने सिंहासन पर भगवान रघुनाथ की मूर्ति स्थापित की गई थी।

दक्षिण भारत: मैसूर महल की भव्यता और हाथियों पर शोभायात्रा
दक्षिण भारत के मैसूर में दशहरा पर्व का आयोजन अत्यंत भव्य रूप में होता है।
सजावट और पुतला दहन: यहां मैसूर महल को विशेष रूप से सजाया जाता है और दीए जलाकर रोशनी की जाती है। इसके साथ ही शहर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाकर जलाए जाते हैं।
सवारी व परंपरा: दक्षिण में मां दुर्गा की मूर्तियों को हाथियों पर सुशोभित कर मंडप तक ले जाया जाता है।

पूर्व भारत: दुर्गा पूजा का उल्लास और सिंदूर की परंपरा
पूर्वी भारत में दशहरा पर्व मुख्य रूप से 'दुर्गा पूजा' के रूप में मनाया जाता है, जहां राज्यों के अनुसार दिन और परंपराएं भिन्न-भिन्न होती हैं।
पूजन का समय: नवरात्रों की षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि को मां दुर्गा का विशेष पूजन किया जाता है और अंतिम दिन दशहरा मनाया जाता है।
विशेष परंपरा: इस दौरान महिलाएं मां दुर्गा की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करती हैं और अपने माथे पर सिंदूर लगाती हैं।
पश्चिम भारत: नौ दिनों का गरबा और दशमी का पर्व
पश्चिम भारत में गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा पूरे देश में जानी जाती है।
गरबा नृत्य: गुजरात में नवरात्र के नौ दिनों तक लोक नृत्य गरबा खेला जाता है। लोग लोक गीतों की धुन पर गरबा नृत्य करते हुए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं।
दशहरा उत्सव: नौ दिनों के गरबा और पूजन के पश्चात दसवें दिन (दशमी को) दशहरा उत्सव मनाया जाता है।
