Edited By Sarita Thapa,Updated: 13 Sep, 2026 03:36 PM

गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बप्पा की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत खास माना जाता है। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
Ganesh Chaturthi Vastu Upay : गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बप्पा की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत खास माना जाता है। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व पूरे 10 दिनों तक चलता है,लोग अपने घरों में बप्पा की स्थापना करते हैं और पूरे विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि बप्पा की स्थापना और पूजा वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार की जाए, तो घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। तो आइए जानते हैं कि बप्पा की मूर्ति स्थापना के समय कौन से 3 वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए।
प्रतिमा की स्थापना के लिए सही दिशा का चयन
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत बड़ा महत्व होता है। गणपति जी की मूर्ति की स्थापना हमेशा घर के उत्तर-पूर्व में करनी चाहिए। यह दिशा देवी-देवताओं के वास और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। यदि ईशान कोण में स्थान न हो, तो आप उत्तर या पूर्व दिशा का चयन भी कर सकते हैं। मूर्ति की स्थापना कभी भी दक्षिण दिशा में न करें और न ही पूजा करते समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
सूंड की दिशा और मूर्ति का स्वरूप

वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है। इन्हें प्रसन्न करना सहज होता है और ये घर में शांति बनाए रखते हैं। घर में स्थापित करने के लिए हमेशा बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा लाएं। बैठी हुई मुद्रा स्थायी धन, वैभव और स्थिरता का प्रतीक होती है।
पूजा स्थल की सजावट और रंग-संयोजन
गणपति बाप्पा के मंडप या पूजा चौकी पर पीले, लाल या हरे रंग के कपड़े का प्रयोग करें। पीला रंग ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ऊर्जा और शुभता लाता है। गणेश चतुर्थी के दिन घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का वंदनवार जरूर लगाएं। यह मुख्य द्वार से घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक शक्तियों को रोकता है।

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