Edited By Niyati Bhandari,Updated: 15 Aug, 2026 10:35 AM

Ground floor Vastu defects: वास्तु शास्त्र के अनुसार जानें कि कैसे स्वतंत्र घर में ग्राउंड फ्लोर के जल टैंक या सेप्टिक टैंक का प्रभाव ऊपर की मंजिलों पर पड़ता है और मल्टी-स्टोरी फ्लैट में यह नियम कैसे अलग हैं।
Ground floor Vastu defects: यदि आपका घर इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) है, चाहे उसमें कंपाउंड वॉल बनी हो या न बनी हो, ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर और उसके ऊपर के सभी फ्लोर एक ही बिल्डिंग का हिस्सा माने जाते हैं। इसलिए, ग्राउंड फ्लोर के वास्तु का प्रभाव पूरी बिल्डिंग पर पड़ता है। चाहे आप ऊपर की मंजिल पर रह रहे हों या वहां किरायेदार रह रहे हों। ग्राउंड फ्लोर का फ्लोर लेवल, ऊंचाई-नीचाई, अंडरग्राउंड वाटर टैंक, सेप्टिक टैंक, चैम्बर्स और बनावट का प्रभाव ग्राउंड फ्लोर के साथ-साथ ऊपर की सभी मंजिलों पर अवश्य पड़ता है। कंपाउंड वॉल का आकार भी सभी फ्लोर्स को प्रभावित करता है। यहां पूरी बिल्डिंग को एक इकाई मानकर ही वास्तु का आकलन करना चाहिए।
मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग (बहुमंजिला इमारत) में स्थिति भिन्न होती है। यहां ग्राउंड फ्लोर के वास्तु का प्रभाव ऊपर के फ्लैट्स पर नहीं पड़ता, क्योंकि मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में सीढ़ियां, लिफ्ट और पैसेज कॉमन एरिया (सार्वजनिक क्षेत्र) होते हैं। इनका वास्तु प्रभाव किसी इंडिपेंडेंट फ्लैट पर नहीं पड़ता। फ्लैट का वास्तु केवल उसकी अपनी आंतरिक बनावट के अनुसार निर्धारित होता है। अतः कॉमन एरिया (लिफ्ट, सीढ़ियां, ग्राउंड फ्लोर) के दोषों का किसी स्वतंत्र फ्लैट पर सीधा सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
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