Holi 2022: होली को खुशनुमा बनाने के लिए अपनाएं ‘प्रकृति’ में छुपे रंग

Edited By Niyati Bhandari, Updated: 17 Mar, 2022 09:41 AM

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रंग प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा प्रकृति को सुन्दरता से भरते हैं। मनुष्य अपने को खुशनुमा बनाने के लिए रंगों को अनेक प्रकार से उपयोग में लाता है। रंगीन फूल, पत्तियां व फल विभिन्न तरीकों से कीड़ों को आकर्षित करते हैं।

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Holi 2022: रंग प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा प्रकृति को सुन्दरता से भरते हैं। मनुष्य अपने को खुशनुमा बनाने के लिए रंगों को अनेक प्रकार से उपयोग में लाता है। रंगीन फूल, पत्तियां व फल विभिन्न तरीकों से कीड़ों को आकर्षित करते हैं। कीड़े फूलों पर परागण करते हैं, जिससे पौध के बीज तथा फल बनते हैं। प्राकृतिक रंग की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। प्राकृतिक रंग खाद्य  पदार्थों तथा पेय पदार्थों में मिलाने से वांछित रंग देते हैं। प्राकृतिक रंगों को 3 प्रमुख भागों में बांटा गया है।

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प्राणियों से प्राप्त रंग : ये रंग कीड़ों और जीव-जंतुओं से प्राप्त किए जा सकते हैं। जैसे लेसीफर लाका-लाख का लाल रंग, कोकस केक्टी-कार्मिनिक अम्ल का नील लोहित रंग। 

पौधों से प्राप्त रंग : इसमें पौधे के विभिन्न भागों जैसे पत्ती, जड़, छाल, फल, बेरी, बीज तथा फूलों से रंग को अलग किया जा सकता है। ये ही प्राकृतिक रंगों के मुख्य स्रोत हैं। जैसे पलास के फूल से पीला रंग, बिक्सा के बीज से पीला एवं नारंगी रंग।

खनिज पदार्थों से प्राप्त रंग : इनमें रंगों को खनिज पदार्थों से प्राप्त किया जाता है। जैसे सफेद रंग को सफेद लेड से, सिंदूरी रंग को लाल लेड से, सफेद रंग चीनी मिट्टी केओलिन से।

कृत्रिम रंगों का प्रभाव विषैला : नुक्सान होने के कारण संसार भर में विकसित तथा विकासशील देशों ने खाद्य एवं पेय पदार्थों, सौंदर्य सामग्री तथा औषधियों में कृत्रिम रंगों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया तथा कुछ ही कृत्रिम रंगों को व्यावहारिक प्रयोग में लाने की इजाजत दी गई, जिससे प्राकृतिक रंगों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

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प्राकृतिक रंगों के फायदे : प्राकृतिक रंगों का पूरे तरीके से मिलान हो जाता है। इनसे प्रदूषण नहीं होता है। इनसे बनी रंग की छटा, गहरी एवं मनभावन होती है। यह रंग एक साथ फीका पड़ता है तथा अपनी स्वाभाविक प्रकृति को बनाए रखता है। इससे एलर्जी नहीं होती। इसकी रंगाई जलाऊ लकड़ी के द्वारा की जाती है। इसके लिए साधारण सामग्री एवं उपकरण प्रयोग में लाए जाते हैं। यह कीट अवरोधक होता है। इनका उपयोग आर्थिक दृष्टि से भी फायदेमंद है। प्राकृतिक रंग खाने के उपयोग में बेहतर सिद्ध हुए हैं।  

भारत में पाए जाने वाले रंग देने वाले कुछ खास पौधे : कीकर (बबूल) भूरा-काला, खैर (कत्था), लाल व भूरा, सफेद कीकर -लाल, जंगली अखरोट-भूरा, ढाक/पलाश -पीला, पलाश लता-लाल, केसर-पीला, हल्दी-पीला, नील-नीला, मेहंदी-लाल, कमला (सिन्दूरी)-गहरा नारंगी, आंवला-भूरा, लाल चंदन-गहरा लाल, जामुन-लाल, बहेरा-काला, बादाम-काला, बेर-गुलाबी,लाल। 

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