Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 Aug, 2026 02:13 PM

सावन के पवित्र महीने की शुरुआत 30 जुलाई, 2026 से हो चुकी है। सावन का महीना शुरू होते ही चारों तरफ 'हर हर महादेव' और 'जय भोलेनाथ' के जयकारों की गुंज सुनाई देने लगती है।
Kawad Yatra 2026 : सावन के पवित्र महीने की शुरुआत 30 जुलाई, 2026 से हो चुकी है। सावन का महीना शुरू होते ही चारों तरफ 'हर हर महादेव' और 'जय भोलेनाथ' के जयकारों की गुंज सुनाई देने लगती है। इस महीने में शिव जी के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना तो करते हैं, लेकिन कुछ लोग मीलों पैदल चलकर गंगाजल लाते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। कावड़ यात्रा और जल चढ़ाने के लिए बहुत सारे नियमों का पालन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि जलाभिषेक में इन नियमों का पालन न किया जाएं तो कावड़ यात्रा अधूरी मानी जाती है। तो आइए जानते हैं जलाभिषेक करते समय कौन से नियमों का पालन करना चाहिए।
कांवड़ यात्रा के 5 सबसे जरूरी नियम
जमीन पर न रखें कांवड़
कावड़ यात्रा का सबसे पहला और खास नियम यह है कि कावड़ को भूलकर भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। यदि रास्ते में आपको आराम करना है या शौच जाना है, तो कावड़ को किसी स्टैंड या पेड़ की शाखा पर लटकाकर जाएं। माना जाता है कि कावड़ जमीन से छूते ही खंडित हो जाता है।

बिना स्नान किए स्पर्श वर्जित
यदि कोई शिवभक्त आराम करने के बाद दुबारा कावड़ को बिना नहाएं या बिना हाथ-मुंह धोए छूता है, तो कावड़ यात्रा का पुण्य फल नहीं मिल पाता। कावड़ यात्रा के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धा बनाएं रखना बहुत जरूरी होता है।
नशा और तामसिक भोजन से पूर्ण दूरी
जो लोग कावड़ यात्रा कर रहे होते हैं, उन लोगों को नशा सिगरेट, शराब या भांग जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए और तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन, मांस का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि जो कावड़ी गलती से भी इन चीजों का सेवन करता है उसकी यात्रा अधूरी रह जाती है और भोलेनाथ रुष्ट हो जाते हैं।

चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग न करें
यात्रा के दौरान चमड़े से बनी चीजों जैसे बेल्ट, पर्स या चमड़े के जूते-चप्पल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। कांवड़ यात्रा ज्यादातर नंगे पैर या सूती कपड़ों की मर्यादा के साथ ही की जाती है।
वाणी पर नियंत्रण
कांवड़ लाते समय किसी के प्रति मन में ईर्ष्या, क्रोध या अपशब्द नहीं आने चाहिए। पूरे रास्ते सिर्फ बम-बम भोले का जाप करें। किसी का अपमान करने से आपकी कठिन तपस्या का फल नष्ट हो सकता है।

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