Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 Sep, 2026 06:37 PM

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के बारे में आखिर कौन-नहीं जानता। शायद ही ऐसा कोई हो जिसने आज तक श्री कृष्ण से जुड़ी एक भी लीला न सुनी हो। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन जितना अद्भुत है, उतनी ही रहस्यमयी उनकी लीलाएं मानी जाती है।
Krishna 16108 wives Story : भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के बारे में आखिर कौन-नहीं जानता। शायद ही ऐसा कोई हो जिसने आज तक श्री कृष्ण से जुड़ी एक भी लीला न सुनी हो। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन जितना अद्भुत है, उतनी ही रहस्यमयी उनकी लीलाएं मानी जाती है। श्रीकृष्ण से जुड़ा एक मान्यता बहुत ही प्रचलित मानी जाती है, कि श्रीकृष्ण की कुल 16,108 पत्नियां थी। लेकिन सबके मन में यह सवाल आता है कि क्या यह मान्यता सत्य भी है। क्या वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण ने 16,108 शादियां की थी और अगर कि भी थी तो यह संभव कैसे हुआ। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियों से जुड़ी कई कथाएं मिलती है। तो आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण ने 16,108 शादियां से जुड़ी प्रचलित कथाओं के बारे में-
भगवान श्रीकृष्ण ने 16,108 शादियां जुड़ी कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की 08 शादियां हुई थी और इन्हीं आठ को उनकी प्रमुख पत्नियां माना गया है जिनमें श्रीकृष्ण की पहली पत्नी का नाम रुक्मिणी दूसरी सत्यभामा तीसरी जाम्बवती चौथी कालिंदी पांचवीं मित्रविंदा छठी नाग्नजिती सातवीं भद्रा और आठवीं का नाम लक्ष्मणा बताया गया है। इन आठ रानियों को अष्टभार्या और अष्टमहिषी के नाम से भी जाना जाता है। बात करें बाकी 16100 हज़ार रानियों की तो इससे जुड़ी एक कथा प्रचलित मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नरकासुर नाम के शक्तिशाली दैत्य ने हज़ारों कन्यायों को बलपूर्वक बंदी बना लिया था। कहा जाता है कि नरकासुर का जन्म भूदेवी से हुआ था और उसे वरदान था कि उसका वध केवल उसी की माता के हाथों से हो सकता है।

मान्यताओं के अनुसार सत्यभामा को भूदेवी का अवतार माना जाता है। इसलिए जब भगवान श्रीकृष्ण को नरकासुर का आतंक का पता चला तो वह अपनी पत्नी सत्यभामा के संग नरकासुर का वध करने के लिए पहुंचे। जहां युद्ध के दौरान देवी सत्यभामा ने नरकासुर का अंत किया और 16100 हज़ार कन्यायों को कैद से मुक्त करवाया। लेकिन एक बड़ी समस्या सामने आ खड़ी हुई। वह सभी कन्याएं बहुत दुःखी थी और उनका मानना था कि समाज में उन्हें कोई नहीं स्वीकार करेगा। वह सभी अपमानित महसूस कर रही थी। उन्होंने कहा कि हमारे पास केवल दो ही रास्ते हैं या तो हम आजीवन वेश्यावृत्ति को अपना लें या फिर आत्महत्या कर लें। तब इस समस्या को देखते हुए श्रीकृष्ण ने इन कन्याओं को अपनी रानियों का स्थान प्रदान किया और सभी के साथ द्वारिका चलें गए। वहां जाकर वह सभी कन्याएं सुखी जीवन व्यतीत करने लगी। श्रीकृष्ण ने उन सभी को वह दर्जा प्रदान किया जिससे वह सारा जीवन खुशी और सम्मान के साथ जी सकें।
एक अन्य कहानी के अनुसार पिछले जन्म में यह 16100 कन्याएं ऋषि-मुनि थी। कहा जाता है कि इन सभी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। अगले जन्म में इन्हीं ऋषियों ने उन कन्याओं के रूप में जन्म लिया और श्रीकृष्ण की उन्हें अपनी पत्नी होने का दर्जा प्रदान कर उनकी मनोकामना पूर्ण की।

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