Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Jul, 2026 12:06 PM

सनातन धर्म में पार्वती जयंती को बहुत खास माना जाता है। हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पार्वती जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर माता पार्वती का जन्म पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर हुआ था।
Parvati Jayanti 2026 : सनातन धर्म में पार्वती जयंती को बहुत खास माना जाता है। हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पार्वती जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर माता पार्वती का जन्म पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर हुआ था। इस साल पार्वती जयंती 21 जुलाई, 2026 को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से मां पार्वती की पूजा करने और व्रत रखने से सभी मनोकामना पूरी होती है और वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है। तो आइए जानते हैं कि पार्वती जयंती के शुभ मुहूर्त और पूजा के सही समय के बारे में-
पार्वती जयंती 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 21 जुलाई 2026 की सुबह 4 बजकर 2 मिनट पर होगी और इसका समापन 22 जुलाई 2026 की सुबह 5 बजकर 16 मिनट पर होगा। ऐसे में 21 जुलाई 2026, मंगलवार को पार्वती जयंती मनाई जाएगी।

पार्वती जयंती की पूजा के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 14 मिनट से सुबह 04 बजकर 55 मिनट तक
प्रातः संध्या: सुबह 04 बजकर 35 मिनट से सुबह 05 बजकर 36 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से दोपहर 03 बजकर 39 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07 बजकर 17 मिनट से शाम 07 बजकर 38 मिनट तक
सायाह्न संध्या: शाम 07 बजकर 19 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक
अमृत काल: दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से दोपहर 03 बजकर 41 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: रात 12 बजकर 07 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक
पार्वती जयंती का व्रत महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पार्वती जयंती का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह दृढ़ संकल्प और अटूट प्रेम का प्रतीक है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से मां पार्वती की पूजा करने से मनचाहे वर की प्राप्ति होती है और सुहागिन महिलाओं के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति की लंबी उम्र होती है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ