Ashadha Gupt Navratri 2026: मनोकामना पूर्ति के लिए बेहद खास हैं ये 9 दिन, जानें 10 महाविद्याओं की गुप्त साधना का रहस्य और महत्व

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 01:56 PM

ashadha gupt navratri 2026

Ashadha Gupt Navratri 2026: साल 2026 की आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 से 23 जुलाई तक है। जानें, दसों महाविद्याओं का महत्व और कैसे उनकी गोपनीय पूजा से तांत्रिक शक्तियां और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Ashadha Gupt Navratri 2026: सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। आमतौर पर लोग साल में केवल दो बार (चैत्र और शारदीय) आने वाली नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं, लेकिन इनके अलावा साल में दो बार 'गुप्त नवरात्रि' भी आती है। आषाढ़ और माघ मास में आने वाली ये गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना और गोपनीय पूजा के लिए जानी जाती हैं। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी।

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आम नवरात्रि से क्यों अलग है गुप्त नवरात्रि?
जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में माता दुर्गा के नौ रूपों की सात्विक पूजा और सार्वजनिक उत्सव मनाए जाते हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की गोपनीय साधना की जाती है। इसमें साधक शांतिपूर्वक और गुप्त तरीके से तांत्रिक विधियों द्वारा विशेष शक्तियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

 गुप्त नवरात्रि की साधना को अत्यंत सावधानी और किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए, क्योंकि यह पूर्णतः गोपनीय और तांत्रिक विधान पर आधारित होती है।

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जानिए, कौन हैं 10 महाविद्याएं और उनकी महिमा:
मां काली: मां काली की पूजा सब संकटों से उभरने के लिए की जाती है। मां काली का रूप बहुत ही गुस्से वाला है। जितनी जल्दी वो क्रोधित होती हैं, उतनी ही जल्दी प्रसन्न भी हो जाती हैं। सच्चे मन से इनकी पूजा करने से हर तरह के शत्रुओं से निजात मिलती है। मां को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए-  ॐ हृीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा।।

मां तारा: देवी तारा को तांत्रिकों की मुख्य देवी माना जाता है। इन्हें सफेद तारा या नील तारा भी कहते हैं। तिब्बत में माता तारा का विशेष स्थान है। अगर मां को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस मंत्र का जाप करें- ऊँ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्‌ ।।

मां त्रिपुरसुंदरी- यदि कोई व्यक्ति गुप्त रूप से मां त्रिपुरासुंदरी की पूजा करता है, उन्हें भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। माता त्रिपुरा सुंदरी की चार भुजा और 3 नेत्र हैं। मां को खुश करने के लिए इस मंत्र का जाप करें- ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ।।

मां भुवनेश्वरी- मां भुवनेश्वरी की पूजा करने से संतान की चाह वाले दंपत्तियों की इच्छा पूरी हो जाती है। इन्हें माता भुवनेश्वरी को शताक्षी और शाकम्भरी भी कहते हैं। मां की कृपा के लिए इस मंत्र का जाप करें- ह्नीं भुवनेश्वरीयै ह्नीं नम ।।

मां छिन्नमस्ता- सौभाग्य की प्राप्ति के लिए गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा करनी चाहिए। कहते हैं मां के दर्शन भक्त के साधना के तरीके पर निर्भर करते हैं। अगर कोई व्यक्ति शांत मन से उनकी पूजा करेगा तो उसे शांत रूप के दर्शन होंगे और उसी के साथ उग्र रूप से साधना करने पर माता के उग्र रूप के दर्शन होते हैं। मां के प्रिय मंत्र का जाप करें- श्रीं हृीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हृीं फट स्वाहा।।

भैरवी- मां भैरवी की पूजा करने से सुख और समृद्धि को प्राप्त किया जा सकता है। जिसके ऊपर मां भैरवी का आशीर्वाद हो उसे कभी भय का सामना नहीं करना पड़ता। माता के मंत्रों का जाप करने से कभी भी धन की कमी नहीं रहती। मां का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप करें- ह्नीं भैरवी क्लौं ह्नीं स्वाहा

धूमावती- मां धूमावती की पूजा करने से बड़ी से बड़ी परेशानी मिनटों में दूर हो जाती है। ऋग्वेद में माता धूमावती को सुतरा के नाम से भी जाना गया है। मां की साधना करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। अगर आप भी प्रसन्न रहना चाहते हैं तो मां के इस मंत्र का जाप करें-   ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहाः

मां बगलामुखी- मां बगलामुखी की पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। मां जिस पर अपनी कृपा बरसाती हैं, उसे जीवन में कभी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता। मां को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करें – ऊँ ह्रीं बगलामुखी देव्यै ह्रीं ओम नमः

मां मातंगी- गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए मां मातंगी की पूजा करनी चाहिए। मां की पूजा करने से व्यक्ति कला के क्षेत्र में बहुत आगे जाता है। इन्हें देवी सरस्वती का भी एक रूप कहते हैं। मां का आशीष चाहते हैं तो इस मंत्र का जाप करें – ऊँ ह्नीं ऐ भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा ।।

मां कमला- देवी दुर्गा का दसवां स्वरूप मां कमला की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन के सारे सुख प्राप्त होते हैं। इनके आशीर्वाद से धन और विद्या की प्राप्ति होती है। दुख-दुर्भाग्य को दूर करने के लिए मां के इस मंत्र का जाप करना चाहिए- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।

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