जैन महापर्व संवत्सरी अहिंसा, संयम और तप का पर्व है : राजेश जैन बॉबी

Edited By Updated: 15 Sep, 2026 11:30 AM

samvatsari

जैन धर्म के महान पर्व संवत्सरी की बड़ी महानता है। यह पर्व 15 सितम्बर को देश-विदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस पर्व में जिन धार्मिक गुणों का पालन किया जाता है, वे सभी मानसिक और शारीरिक गुणों को मजबूत करते हैं।

लुधियाना (भूपेश): जैन धर्म के महान पर्व संवत्सरी की बड़ी महानता है। यह पर्व 15 सितम्बर को देश-विदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस पर्व में जिन धार्मिक गुणों का पालन किया जाता है, वे सभी मानसिक और शारीरिक गुणों को मजबूत करते हैं। महापर्व संवत्सरी अहिंसा, संयम और तप का पर्व है। ये विचार जैन धर्म के महान पर्व संवत्सरी के उपलक्ष्य पर पंजाब अल्पसंख्यक आयोग के मैंबर युवारत्न राजेश जैन बॉबी ने विशेष भेंटवार्ता दौरान कहे। 

यह पर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जी के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्म’, ‘जिओ और जीने दो’ की राह पर चलना सिखाता है। संयम और आत्म शुद्धि के इस पवित्र त्यौहार से सभी लोगों को क्षमा, त्याग, सेवा और करुणा की प्रेरणा मिलती है। जैन धर्म के अनुयायी सभी मित्रों, रिश्तेदारों और जीवों से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए मन, वचन, काया से क्षमा याचना करते हैं। यह पर्व मानव को मानव से जोड़ने का पर्व है। यह पर्व हमें जीने की कला भी सिखाता है और आत्म बल प्रदान भी करता है। हमें इस पावन पर्व को मनसा, वाचा कर्मणा शिरोधार्य करना चाहिए।

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