Edited By Niyati Bhandari,Updated: 14 Sep, 2026 12:20 PM

Ganesh Chaturthi 2026: साल 2026 में गणेशोत्सव 10 नहीं पूरे 12 दिनों तक मनाया जाएगा। 9 साल बाद बने इस दुर्लभ पंचांगीय संयोग, स्थापना मुहूर्त और धार्मिक महत्व की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
Ganeshotsav 2026: गणपति बप्पा के भक्तों के लिए साल 2026 का गणेशोत्सव बेहद खास और खुशियों से भरा होने वाला है। अमूमन हर साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेश उत्सव 10 दिनों का होता है, लेकिन इस बार भक्तों को लंबोदर की आराधना के लिए पूरे 12 दिनों का पावन समय मिलेगा।
ज्योतिषविदों और पंचांग गणना के अनुसार, तिथि वृद्धि के कारण बना यह अद्भुत महासंयोग करीब 9 साल बाद दोहराया जा रहा है। इससे पहले साल 2017 में भक्तों को 12 दिनों तक बप्पा की सेवा का अवसर मिला था।
14 सितंबर से 25 सितंबर तक दिखेगी गणेशोत्सव की धूम
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा। इसी दिन विधि-विधान के साथ शुभ मुहूर्त में बप्पा की प्रतिमाएं घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित की जाएंगी। वहीं, 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को अनंत चतुर्दशी पर बाप्पा का भव्य विसर्जन किया जाएगा।

गणेश स्थापना एवं पूजन का शुभ मुहूर्त (14 सितंबर 2026)
पंचांगीय गणना के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को प्रातः 05:22 बजे प्रारंभ होगी, जो 15 सितंबर को प्रातः 07:14 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी।
मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त: दोपहर 11:20 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त (अति शुभ): दोपहर 12:09 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त (सांध्य पूजा): शाम 06:42 बजे से रात 07:05 बजे तक।

क्यों बना 12 दिनों का महासंयोग?
हिंदू धर्म शास्त्रों और चंद्र पंचांग के अनुसार तिथियों की घट-बढ़ चंद्रमा की गति पर निर्भर करती है। इस बार भाद्रपद पक्ष में तिथियों की विशेष गणना के कारण दो तिथियों का विस्तार हुआ है। चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी के मध्य पंचांगीय तिथियों के समायोजन के कारण उत्सव का समय 10 दिन से बढ़कर 12 दिन हो गया है।
धार्मिक मान्यता है कि जितने अधिक दिन गणपति घर में विराजते हैं, घर-परिवार में सुख, समृद्धि और रिद्धि-सिद्धि का स्थायी वास होता है। शास्त्रों के अनुसार यद्यपि सार्वजनिक उत्सव 12 दिनों का रहेगा, लेकिन श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और संकल्प के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन, 10 दिन या पूरे 12वें दिन भी बप्पा का विसर्जन कर सकते हैं।
