Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Jun, 2026 12:07 PM

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का सम्मान और प्रतिष्ठा किसी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से ऊंची है। उन्होंने पूछा कि यदि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह श्री अकाल तख्त साहिब के सामने सिर झुका सकते थे, तो पंजाब के...
चंडीगढ़ (हरिश्चंद्र): पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का सम्मान और प्रतिष्ठा किसी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से ऊंची है। उन्होंने पूछा कि यदि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह श्री अकाल तख्त साहिब के सामने सिर झुका सकते थे, तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान क्यों नहीं?
ढिल्लों ने कहा कि शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह वह महान शासक थे, जिनके नाम से अफगान और मुगल भी कांपते थे तथा जिनके नेतृत्व में पंजाब एक शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में उभरा, लेकिन जब श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें तलब किया, तो वह एक सम्राट के रूप में नहीं बल्कि गुरु घर के विनम्र सेवक के रूप में उपस्थित हुए।
उन्होंने कहा कि जत्थेदार अकाली बाबा फूला सिंह ने महाराजा रणजीत सिंह को तनखाइया करार दिया था। महाराजा ने बिना किसी विरोध के उस दंड को स्वीकार किया और विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुकाया। उनकी इस अद्वितीय विनम्रता को देख कर संगत ने उन्हें क्षमा कर दिया। यही एक सच्चे शेर-ए-पंजाब की पहचान थी, जिसके लिए धर्म और पंथ हर प्रकार की राजनीतिक या राजसत्ता से ऊपर थे।