Edited By Sahil Kumar,Updated: 13 Aug, 2026 04:42 PM

ऑनलाइन डिलीवरी एप जेप्टो फिलहाल गहरे विवादों में आ गया है। बेंगलुरु में क्विक-कॉमर्स कंपनी जेप्टो के एक गोदाम पर फूड सेफ्टी वालों ने छापा मारा सबके होश उड़ गए। दरअसल, यहां होस्कोटे तालुक स्थित गोदाम में फर्श पर कचरे का ढेर पड़ा हुआ मिला जिसमें...
नई दिल्ली : ऑनलाइन डिलीवरी एप जेप्टो फिलहाल गहरे विवादों में आ गया है। बेंगलुरु में क्विक-कॉमर्स कंपनी जेप्टो के एक गोदाम पर फूड सेफ्टी वालों ने छापा मारा सबके होश उड़ गए। दरअसल, यहां होस्कोटे तालुक स्थित गोदाम में फर्श पर कचरे का ढेर पड़ा हुआ मिला जिसमें इस्तेमाल किए गए रैपर और बोतलें और खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे पड़े मिले। वेयरहाउस को खाद्य सुरक्षा नियमों में कमियां मिलने के बाद सील किया गया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब जेप्टो विवाद में आया हो। इससे पहले भी कई बार विवादों के घेरे में आ चुका है। आइए जानें पूरी टाइमलाइन
जब डार्क पैटर्न को लेकर मचा हड़कंप
सबसे पहले जेप्टो साल 2024 में डार्क पैटर्न के मामले में चर्चा में आया था। इसको लेकर मार्केट में काफी हड़कंप मचा था। आपको बता दें कि डार्क पैटर्न का मतलब होता है कि जो आप सामान चुनते हैं उसे ब़ड़े ही डिजाइन या तरीके से पेश किया जाता है ताकि आप खरीदें, लेकिन असल में जब आप उसको खरीदते हैं तो पूरी जानकारी आसानी से नहीं मिलती। दिसंबर 2024 में एक शख्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल की थी, जिसमें जेप्टो पर कई गंभीर आरोप लगाए गए। इनमें काम का दबाव, लंबे समय तक काम करने जैसी शिकायतों के अलावा ग्राहकों से अलग-अलग कीमत वसूलने के आरोप भी शामिल थे। लेकिन इन सोशल मीडिया दावों को कंपनी या किसी सरकारी जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
यूजर्स को कीमत अलग-अलग दिखाई गई
इसके बाद साल 2025 की शुरुआत में जेप्टो के एक ही सामान की कीमत अलग-अलग मोबाइल फोन या यूजर के हिसाब से अलग दिखाई गई। बेंगलुरु की एक महिला ने एंड्रॉयड और आईफोन पर जेप्टो के सामान की कीमत का कंपेरिजन किया था। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में महिला ने अपने हाथ में एंड्रॉयड स्मार्टफोन और आईफोन लिया हुआ है। महिला ने दिखाया कि आईफोन पर शिमला मिर्च का रेट 69 रूपए दिखाया जा रहा है तो वहीं एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर उसकी कीमत 37 रूपए आ रही है। इससे साफ दिखा कि जेप्टो ने कीमतें भी यूजर्स के हिसाब से तय की हैं, जोकि एक धोखा था। इसके बाद कंपनी के प्राइसिंग सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए थे।
सरकार ने मई 2025 में भेजा नोटिस
बता दें कि फिर डार्क पैटर्न का मामला केंद्र सरकार तक भी पहुंचा था। मई 2025 में केंद्र सरकार ने तब जेप्टो समेत 11 कंपनियों को नोटिस भेजा। सरकार ने डार्क पैटर्न को लेकर जवाब मांगा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े नियमों का सही पालन करने को कहा। इस कार्रवाई से साफ हुआ कि सरकार ऑनलाइन कंपनियों के ऐप और वेबसाइट पर ग्राहकों को प्रभावित करने वाले तरीकों को लेकर गंभीर है।
मुंबई में Zepto से जुड़े वेयरहाउस का लाइसेंस निलंबित
फिर जून 2025 में Zepto को उस समय बड़ा झटका लगा था जब महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मुंबई के धारावी स्थित जेप्टो से जुड़े वेयरहाउस का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। एफडीए की जांच के दौरान वहां खाद्य सामान पर फंगस, एक्सपायर्ड सामान और स्टोरेज से जुड़ी कमियां पाई गईं थी। खाद्य सुरक्षा से जुड़े इन उल्लंघनों के बाद प्रशासन ने वेयरहाउस का लाइसेंस निलंबित कर दिया।
CEO ने डार्क पैटर्न को माना गलती
केंद्र सरकार द्वारा एक्शन में आने के बाद नवंबर 2025 में जेप्टो के सह-संस्थापक और सीईओ आदित पालिचा ने डार्क पैटर्न को लेकर कंपनी की रणनीति पर बात करते हुए माना कि कुछ तरीकों को अपनाना कंपनी की गलती थी और आलोचना के बाद उन्हें हटाया गया।
दिसंबर 2025 में लगा 7 लाख का जुर्माना
पूरी जांच होने के बाद डार्क पैटर्न के मामले में जेप्टो पर गाज गिरी। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने जेप्टो पर दिसंबर 2025 में कथित डार्क पैटर्न और कीमतों को स्पष्ट तरीके से नहीं दिखाने से जुड़े मामले में 7 लाख का जुर्माना लगाया।