Edited By Sarita Thapa,Updated: 01 Oct, 2026 08:25 AM

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की भावनाएं आहत होंगी, इसलिए इन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, लेकिन लगातार आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं दी जाएगी।
नई दिल्ली (एजैंसी): सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की भावनाएं आहत होंगी, इसलिए इन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, लेकिन लगातार आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं दी जाएगी। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि पटाखे चलाने के लिए समय तय करके बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए।
पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “हम यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहते हैं। न तो हम पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं और न ही हम उन्हें दिन के 24 घंटे पटाखे जलाने की इजाजत देंगे। पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से लोगों की भावनाएं आहत होंगी। और अगर उन्हें पूरे दिन पटाखे जलाने की इजाजत दी गई, तो इसका बुरा असर बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों समेत सभी जीवित प्राणियों पर पड़ेगा।
अदालत ने कहा, “हमें कोई ऐसा समाधान खोजना होगा जिससे हम एक निश्चित समय दे सकें।” सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एक नोट पेश किया। इसमें कहा गया कि सी.एस.आई.आर.-एन.ई.ई.आर.आई. की सिफारिश के अनुसार, खास ‘अगली पीढ़ी के संयुक्त हरित पटाखे’ के मामले में सीमित और सशर्त छूट पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए शोर, उत्सर्जन और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना होगा और इन पटाखों को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सी.एस.आई.आर.-एन.ई.ई.आर.आई.) के सहयोग से विकसित, अगली पीढ़ी के हरित पटाखे कम उत्सर्जन के लिए कम मात्रा में बेरियम लवणों के साथ तैयार किए गए नए फॉर्मूले वाले आतिशबाज़ी उत्पाद हैं। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह 15 अक्टूबर को पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से संबंधित मुद्दे पर विचार करेगी।
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