रिश्तों और बुज़ुर्गों के दर्द को बयां करती है 'गुड़हल', अब OTT पर देखें यह भावुक सामाजिक फिल्म

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 06:47 PM

gudhal movie

Mumbai : बदलते दौर में जहां परिवार और रिश्तों की परिभाषा लगातार बदल रही है, वहीं इन्हीं संवेदनशील पहलुओं को पर्दे पर लेकर आई है हिंदी फीचर फिल्म 'गुड़हल'। यह फिल्म अब हंगामा OTT, एयरटेल एक्सस्ट्रीम, टाटा प्ले बिंज और वॉचो पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध...

Mumbai : बदलते दौर में जहां परिवार और रिश्तों की परिभाषा लगातार बदल रही है, वहीं इन्हीं संवेदनशील पहलुओं को पर्दे पर लेकर आई है हिंदी फीचर फिल्म 'गुड़हल'। यह फिल्म अब हंगामा OTT, एयरटेल एक्सस्ट्रीम, टाटा प्ले बिंज और वॉचो पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है।

 'गुड़हल' की कहानी वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुज़ुर्गों की अनकही पीड़ा, अकेलेपन और अपनों से बिछड़ने के दर्द को बेहद संवेदनशील तरीके से पेश करती है। फिल्म यह सवाल भी उठाती है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में क्या हम अपने सबसे करीबी रिश्तों और पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं। मनोरंजन के साथ-साथ यह फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने और समाज के एक अहम मुद्दे पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।

फिल्म का लेखन, निर्देशन और निर्माण युवराज पराशर ने किया है। उन्होंने एक ऐसी कहानी को बड़े पर्दे पर उतारा है जो हर उम्र के दर्शकों को अपने परिवार और बुज़ुर्गों के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराती है। फिल्म में मोना अंबेगांवकर, पूजा सिंह, शहबाज़ खान, सुनीता राजवार, जसवीर कौर और सुधा चंद्रन जैसे अनुभवी कलाकार अहम भूमिकाओं में नज़र आए हैं। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से कहानी को प्रभावशाली और भावनात्मक बनाया है।

फिल्म की एक और खासियत इसका शीर्षक गीत है, जिसे मशहूर पार्श्व गायक जावेद अली ने अपनी आवाज़ दी है। उनकी भावपूर्ण गायकी फिल्म की संवेदनाओं को और गहराई देती है तथा दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ती है।

'गुड़हल' की शूटिंग मुंबई और आगरा के विभिन्न स्थानों पर की गई है। फिल्म की लोकेशन कहानी के भावों के अनुरूप चुनी गई हैं, जिससे इसका दृश्यात्मक प्रभाव और भी मजबूत बनता है।

निर्देशक युवराज पराशर इससे पहले अपनी शॉर्ट फिल्म 'बहार' के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। इस फिल्म को दुनिया भर के विभिन्न फिल्म समारोहों में 14 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। वहीं अभिनेता के रूप में वे 'फैशन', 'द पास्ट', 'मोक्ष टू माया', 'लाइट्स कैमरा मर्डर' और हाल ही में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) के नेशनल कॉम्पिटिशन सेक्शन में प्रदर्शित 'लौंडा नाच' जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे हैं।
 
फिल्म को लेकर युवराज पराशर का कहना है, "गुड़हल सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि उन भावनाओं को सामने लाने का प्रयास है जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, लेकिन उन पर बात नहीं करते। अगर यह फिल्म लोगों को अपने माता-पिता और बुज़ुर्गों के प्रति थोड़ा और संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करती है, तो यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।"

इन दिनों OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट आधारित फिल्मों को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। ऐसे में 'गुड़हल' भी एक ऐसी फिल्म के रूप में सामने आई है, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करती बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी देती है। परिवार, रिश्तों और मानवीय मूल्यों पर आधारित यह फिल्म उन दर्शकों के लिए खास साबित हो सकती है, जो संवेदनशील और सार्थक सिनेमा देखना पसंद करते हैं।

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