Edited By Niyati Bhandari,Updated: 15 Jul, 2026 02:00 PM
Saturn Retrograde Predictions: ज्योतिष शास्त्र में 'न्याय के कारक' माने जाने वाले शनि देव 27 जुलाई से मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं। शनि की यह वक्री अवस्था 11 दिसंबर तक यानी कुल 138 दिनों तक चलेगी। चूंकि मीन एक जल तत्व की राशि है, इसलिए इस...
Shani Vakri in Pisces: ज्योतिष में न्याय के कारक देवता शनि देव 27 जुलाई से मीन राशि में वक्री अवस्था में आ जाएंगे। शनि 11 दिसंबर तक वक्री रहेंगे और 138 दिन की शनि की इस वक्री अवस्था के दौरान पूरी दुनिया में गहन भावनात्मक और मानसिक तीव्रता का दौर रहेगा। चूंकि मीन जल तत्व की राशि है, इसलिए बाढ़, मानसून की अनियमितता, समुद्र के बढ़ते खतरे, समुद्री व्यवधान या पर्यावरणीय असंतुलन जैसे जल तत्व से जुड़े मुद्दे इस दौरान प्रमुख रूप से उठेंगे। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर भ्रम, निर्णय लेने में देरी और नेतृत्व या नीतियों में स्पष्टता की कमी देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता और उपचार (हीलिंग) पर अधिक ध्यान दिया जाएगा तथा छिपे हुए या लंबे समय से अनसुलझे वैश्विक मुद्दे सुधार के लिए फिर से सामने आ सकते हैं। वक्री शनि का सभी 12 लग्नों के जातकों पर निम्न प्रभाव रहेगा।
मेष
मेष लग्न के जातकों के लिए शनि 10वें और 11वें भाव के स्वामी हैं और 12वें भाव में वक्री हैं। इस कारण लंबे समय से प्रतीक्षित प्रमोशन या अप्रेज़ल में देरी हो सकती है। हालांकि इस दौरान धन आएगा, लेकिन अचानक यात्रा या अस्पताल के खर्चों में निकल सकता है। आप मानसिक रूप से थका हुआ महसूस कर सकते हैं, नींद का पैटर्न प्रभावित हो सकता है और अधिक सोचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। यह आध्यात्मिक विकास, ध्यान और अतीत के बोझ को छोड़ने का एक शक्तिशाली समय है।
वृषभ
वृषभ लग्न के जातकों के लिए शनि आपके 9वें और 10वें भाव के स्वामी हैं और 11वें भाव में वक्री होंगे। इस से आर्थिक लाभ, मित्रता और सामाजिक दायरे में अप्रत्याशित परिणाम मिल सकते हैं। यह समय आपको त्वरित लाभ के बजाय स्थायी सफलता बनाने में मदद करेगा। उद्देश्यपूर्ण नेटवर्किंग लंबे समय में लाभदायक रहेगी। कड़ी मेहनत के बावजूद अपेक्षित प्रोत्साहन या सहयोग समय पर नहीं मिल सकता। पुराने प्रयासों का परिणाम मिल सकता है।
मिथुन
मिथुन लग्न के जातकों के लिए 8वें और 9वें भाव के स्वामी करियर से संबंधित 10वें भाव में वक्री होंगे। इस से कार्य का दबाव बढ़ सकता है और वरिष्ठ अधिकारी आपके धैर्य की परीक्षा ले सकते हैं। करियर की दिशा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता महसूस हो सकती है। पुराने पेशेवर मुद्दे फिर सामने आ सकते हैं। अनुशासन और निरंतरता पर ध्यान दें। यह समय आपके पेशेवर जीवन को दीर्घकालिक स्थिरता के लिए पुनर्गठित करने का है। अभी की गई मेहनत भविष्य में लाभ देगी।
कर्क
कर्क लग्न के जातकों के लिए शनि 7वें और 8वें भाव के स्वामी हैं और 9वें भाव में वक्री होंगे। वक्री शनि के प्रभाव से यात्रा, उच्च शिक्षा या कानूनी मामलों में देरी हो सकती है। पिता या गुरु समान व्यक्तियों के साथ संबंधों पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।आध्यात्मिक विकास के अच्छे योग हैं, लेकिन इसके लिए अनुशासन आवश्यक होगा। यदि कुछ समय के लिए स्पष्टता न भी मिले, तो भी प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखें। गुरु या जीवनसाथी के साथ पुराने विवाद समाप्त हो सकते हैं।
सिंह
सिंह लग्न के जातकों के लिए शनि 6वें और 7वें भाव के स्वामी हैं और 8वें भाव में वक्री होंगे। यहां वक्री शनि के प्रभाव से संयुक्त धन, ऋण या विरासत से जुड़े मामलों में देरी या जटिलता आ सकती है। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी। जोखिम भरे निर्णय और गोपनीयता से जुड़े मामलों में सावधानी रखें। उपचार, शोध और जीवन के गहरे सत्य को समझने पर ध्यान दें। इससे भावनाएं तीव्र होंगी, लेकिन लंबित वित्तीय या रिश्तों से जुड़े मामलों का समाधान भी संभव है।
कन्या
कन्या लग्न के जातकों के लिए शनि 5वें और 6वें भाव के स्वामी हैं और सातवें भाव में वक्री होंगे। जीवन साथी वाले भाव में शनि के वक्री होने से वैवाहिक जीवन और रिश्तों की परीक्षा हो सकती है। संवाद में कमी, भावनात्मक दूरी या गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। पुराने रिश्ते सुधार के लिए फिर सामने आ सकते हैं। जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय या संबंध तोड़ने का फैसला न लें। धैर्य, परिपक्वता और स्पष्ट संवाद बनाए रखें। इस समय साझेदारी में जिम्मेदारी निभाना आवश्यक होगा।
तुला
तुला लग्न के जातकों के लिए शनि 4वें और 5वें भाव भाव के स्वामी हैं और 6वें भाव में वक्री होंगे। इस भाव में वक्री शनि आपके स्वास्थ्य, दिनचर्या और विवादों को प्रभावित करेगा। तनाव या पाचन संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कानूनी मामले, ऋण या विवाद धीमे पड़ सकते हैं, लेकिन उन पर ध्यान देना आवश्यक रहेगा। आपको अपनी दिनचर्या और आदतों को पुनर्गठित करना पड़ सकता है। फिटनेस पर काम करने के लिए यह अच्छा समय है। सफलता निरंतर प्रयासों से मिलेगी।
वृश्चिक
वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए तीसरे और चौथे भाव के स्वामी हैं और 5वें भाव में वक्री होंगे। पांचवें भाव में वक्री शनि रचनात्मकता, प्रेम संबंध और संतान से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकते हैं। भावनाओं को व्यक्त करना कठिन लग सकता है। संतान से जुड़े मामलों में धैर्य रखना होगा। सट्टा निवेश से बचें। जीवन में खुशी और सहजता कम महसूस हो सकती है। यह समय प्रेम जीवन में परिपक्वता लाने के लिए प्रेरित करेगा। पुराने रचनात्मक विचार या प्रयास फिर से जीवित हो सकते हैं।
धनु
धनु लग्न के जातकों के लिए शनि दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी हैं और चौथे भाव में वक्री होंगे। चौथे भाव में वक्री शनि के कारण घरेलू शांति प्रभावित हो सकती है। भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों में देरी हो सकती है। आप अपने आरामदायक माहौल से कटे हुए महसूस कर सकते हैं। माता और घर से जुड़े मामलों पर ध्यान देना होगा। यह समय भावनात्मक स्थिरता को दोबारा बनाने का है। संपत्ति से जुड़े निर्णय जल्दबाजी में न लें। स्वयं को स्थिर रखने और आंतरिक शांति विकसित करने पर ध्यान दें।
मकर
मकर लग्न के जातकों के लिए शनि पहले और दूसरे भाव के स्वामी हैं और तीसरे भाव में वक्री होंगे। इस भाव में शनि के वक्री होने से संचार, यात्राएं और भाई-बहनों के साथ संबंध प्रभावित होंगे। अपनी बात कहने में झिझक महसूस हो सकती है। छोटी यात्राओं में देरी हो सकती है। आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव रहेगा। प्रयासों का परिणाम मिलने में समय लग सकता है। अधिक सोचने और स्वयं पर संदेह करने से बचें। यह समय अपने कौशल और संवाद क्षमता को बेहतर बनाने का है।
कुंभ
कुंभ लग्न के जातकों के लिए शनि लग्न और बाहरवें भाव के स्वामी हैं और दूसरे भाव में वक्री होंगे। इस भाव में शनि के वक्री होने से धन, परिवार और वाणी प्रभावित हो सकती है। आर्थिक योजना बनाना आवश्यक होगा क्योंकि देरी या अस्थिरता आ सकती है। अनावश्यक खर्चों से बचें। पारिवारिक मामलों पर ध्यान देना होगा। विवादों से बचने के लिए सोच-समझकर बोलें। यह समय आर्थिक अनुशासन और स्थिरता विकसित करने का है। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है।
मीन
मीन लग्न के जातकों के लिए शनि 11वें और 12वें भाव के स्वामी हैं और लग्न में वक्री होंगे। यह समय भीतर से स्वयं को और अधिक मजबूत बनाने का है। लग्न में वक्री शनि के प्रभाव से आप उदास महसूस कर सकते हैं। जीवन धीमा या सीमित महसूस हो सकता है। यह आत्म-परिवर्तन का अत्यंत शक्तिशाली समय है। नकारात्मक सोच से बचें तथा आत्म-अनुशासन, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें।
- गौरी जैन
ज्योतिष और वास्तु एक्सपर्ट