Edited By Niyati Bhandari,Updated: 15 Jul, 2026 02:00 PM

Ashadha Gupta Navratri Vrat Katha: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा का विशेष महत्व है। जानें, राजकुमार सुदर्शन की वह कथा जिसने उनका भाग्य बदल दिया।
Ashadha Gupta Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा-आराधना की जाती है। माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में इन देवियों की पूजा करने से ब्रह्मांड की रहस्यमयी शक्तियां प्रकट होती हैं। साथ ही घर-परिवार में फैली नकारात्मकता दूर होती है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी।
सामान्य नवरात्रि में जहां मां के 9 स्वरूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की आराधना का विधान है। मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में की गई साधना से न केवल ग्रह दोष शांत होते हैं, बल्कि साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व से जुड़ी कथा, जो बताती है कि कैसे एक अनजाने मंत्र जाप ने एक राजकुमार का भाग्य पलट दिया।
Ashadha Gupta Navratri Vrat Katha आषाढ़ गुप्त नवरात्रि व्रत कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में कोशल राज्य के राजकुमार सुदर्शन को राजमहल के षड्यंत्रों के कारण अपनी माता के साथ जंगलों में शरण लेनी पड़ी थी। एक दिन वन में खेलते समय राजकुमार ने कुछ अनजान शब्द सुने और उन्हें बार-बार दोहराना शुरू कर दिया।
वे शब्द और कुछ नहीं बल्कि मां दुर्गा का अत्यंत शक्तिशाली 'क्लीं' बीज मंत्र था। जिस समय राजकुमार यह जाप कर रहे थे, उस समय गुप्त नवरात्रि का पावन काल चल रहा था। उनकी इस अनजानी भक्ति से मां अंबे इतनी प्रसन्न हुईं कि उन्होंने राजकुमार को उनका खोया हुआ राज्य वापस मिलने का आशीर्वाद दिया और आगे चलकर सुदर्शन एक प्रतापी राजा बने।

ऋषि श्रृंगी ने बताया गृह क्लेश और कष्ट मुक्ति का मार्ग
अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार एक दुखी महिला ऋषि श्रृंगी के पास पहुंची। उसने बताया कि उसका पति अधार्मिक कार्यों में लिप्त रहता है, जिसके कारण वह न तो पूजा-पाठ कर पाती है और न ही व्रत रख पाती है।
ऋषि श्रृंगी ने उसे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व बताते हुए देवी की 10 महाविद्याओं की उपासना की सलाह दी। ऋषि ने कहा कि यदि इन दिनों में पूरी श्रद्धा से मां की पूजा की जाए, तो जीवन के समस्त दुखों का अंत होता है। महिला ने वैसा ही किया और मां की कृपा से न केवल उसके घर में सुख-शांति आई, बल्कि उसके पति का हृदय परिवर्तन भी हो गया।
नवदुर्गा के स्वयं सिद्ध बीज मंत्र
शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम: ।
ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: ।
चन्द्रघंटा : ऐं श्रीं शक्तयै नम: ।
कूष्मांडा : ऐं ह्री देव्यै नम: ।
स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: ।
कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम: ।
कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम: ।
महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: ।
सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: ।
