Edited By Mansi,Updated: 11 Sep, 2026 03:43 PM

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म तुला पाहता
फिल्म रिव्यू: ‘तुला पाहता’
कलाकार: पल्लवी अजय, इला भाटे, आनंद काले, मानसी पाटिल, नचिकेत लेले, सतीश पुलेकर, निशिगंधा वाड, दीपाली विचारे, स्वप्निल परजने, आकाश अनंत शिंदे
डायरेक्टर: मयूरा प्रधान
प्लेटफ़ॉर्म: ऐमेजॉन प्राइम
रेटिंग: 3*
प्यार को उम्र, समाज और रिश्तों की तय सीमाओं में बांधना आसान है, लेकिन सच्चा प्यार इन सभी दायरों से कहीं आगे होता है। फिल्म ‘तुला पाहता’ इसी सोच को तीन अलग-अलग पीढ़ियों की कहानी के जरिए सामने रखती है। मयूरा प्रधान के लेखन, निर्देशन और निर्माण में बनी यह मराठी फिल्म थिएटर के बाद अब ओटीटी पर मराठी और हिंदी में उपलब्ध है। फिल्म रिश्तों, अधूरे प्यार और बदलते समय के बीच प्रेम के मायने तलाशती है। आइए जानते हैं कैसी है ‘तुला पाहता’।
कहानी
कहानी की शुरुआत बेस्टसेलर लेखिका अरुंधती देशपांडे (इला भाटे) के एक किताब लॉन्च इवेंट से होती है। अपनी नई किताब की घोषणा करते हुए अरुंधती बताती हैं कि इस बार वह अपनी जिंदगी की कहानी को किताब का हिस्सा बनाने जा रही हैं। उनका नाती सागर वैद्य (नचिकेत लेले) एक वायलिन प्लेयर है और मुंबई में अपनी नानी और माता-पिता के साथ रहता है। वहीं तन्वी देशमुख (मानसी पाटिल) एक मशहूर चेस प्लेयर है, जो अपनी मां और नाना के साथ रहती है। सागर और तन्वी एक-दूसरे से प्यार करते हैं और शादी से पहले अपने रिश्ते को बेहतर तरीके से समझने के लिए कुछ समय लिव-इन में रहने का फैसला करते हैं। दोनों इस फैसले के बारे में अपने परिवारों को भी बता देते हैं।
इसी बीच अरुंधती अपनी किताब पर काम शुरू करती हैं और लिखते-लिखते अपने अतीत में लौट जाती हैं। कहानी फ्लैशबैक में पहुंचती है, जहां युवा अरु यानी अरुंधती महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में अपने फौजी प्रेमी हरी के साथ जिंदगी के खूबसूरत पल बिता रही हैं। तभी खबर आती है कि सीमा पर पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू हो गया है। हरी देश की सेवा के लिए वापस लौट जाता है और अरु से जल्द लौटने का वादा करता है, लेकिन फिर कभी वापस नहीं आता।
समय बीतता है। अरुंधती की शादी हो जाती है और वह अपनी बेटी और नाती के साथ जिंदगी आगे बढ़ाती हैं। लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव में अचानक उनकी मुलाकात उनके उसी पुराने प्यार हरी से हो जाती है। इसके बाद अरुंधती अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे राज परिवार के सामने रखती हैं, जिनका सीधा असर सागर और तन्वी के रिश्ते पर पड़ता है। फिल्म यहीं से कई भावनात्मक सवाल खड़े करती है और कहानी को ऐसे मोड़ पर छोड़ देती है, जहां आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है।
अभिनय
‘तुला पाहता’ की कास्ट फिल्म की मजबूत कड़ियों में से एक है। मानसी पाटिल ने तन्वी के किरदार को सिर्फ प्यार में डूबी युवती के तौर पर नहीं निभाया है। उनका किरदार अपने फैसलों को लेकर स्पष्ट है और अपनी जिंदगी को लेकर उसकी अपनी सोच है। मानसी ने तन्वी की संवेदनशीलता और आत्मविश्वास दोनों को सहजता से पर्दे पर उतारा है। इला भाटे और सतीश पुलेकर अपने अनुभव का पूरा फायदा उठाते हैं। दोनों के अभिनय में एक परिपक्वता और ठहराव दिखाई देता है, जो फिल्म के भावनात्मक हिस्से को मजबूत बनाता है। खासतौर पर इला भाटे ने उम्रदराज अरुंधती के किरदार को अपनी बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन के जरिए गहराई दी है। नचिकेत लेले भी सागर के किरदार में स्वाभाविक लगते हैं। वहीं आनंद काले, निशिगंधा वाड, दीपली विचारे, स्वप्निल परजणे और आकाश शिंदे समेत बाकी कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ अच्छा न्याय किया है।
लेखन और निर्देशन
फिल्म का सबसे मजबूत पहलू इसका संवेदनशील लेखन है। मयूरा प्रधान ने प्रेम की कहानी को सिर्फ रोमांटिक रिश्ते तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके साथ परिवार, जिम्मेदारियों, सामाजिक सोच और रिश्तों में छिपी भावनाओं को भी जोड़ा है। कहानी में रिश्तों की गर्माहट के साथ उनकी जटिलताओं और कड़वाहट को भी जगह दी गई है। यही वजह है कि किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं लगते, बल्कि उनके फैसलों और भावनाओं से दर्शक जुड़ने लगते हैं। फिल्म दर्शकों को जबरन भावुक करने की कोशिश नहीं करती। छोटे-छोटे संवाद, रिश्तों के बीच होने वाले बदलाव और किरदारों की खामोशियां कहानी को आगे बढ़ाती हैं। तीन अलग-अलग पीढ़ियों की प्रेम कहानियों और उनके अनुभवों को एक ही भावनात्मक धागे में पिरोना आसान नहीं था, लेकिन मयूरा प्रधान ने इसे काफी सहज तरीके से संभाला है।